नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज 44वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 भव्य उद्घाटन के साथ शुरू हुआ। वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने मेले का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह आयोजन ‘आकांक्षी भारत’ की अपार संभावनाओं और विश्व अर्थव्यवस्था में उभरते भारतीय प्रभाव का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत @ 2047” के विज़न से प्रेरित यह मेला “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम के साथ देश की तकनीकी प्रगति, आर्थिक मजबूती और वैश्विक आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है।
उद्घाटन समारोह में आईटीपीओ के चेयरमैन श्री नितिन कुमार यादव, एमडी डॉ. नीरज खरवाल, कार्यकारी निदेशक श्री प्रेमजीत लाल, राजस्थान के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री आलोक गुप्ता, बिहार के रेज़िडेंट कमिश्नर श्री कुंदन कुमार, झारखंड के रेज़िडेंट कमिश्नर एवं सचिव श्री अरावा राजकमल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, विदेशी प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।
श्री जितिन प्रसाद ने कहा कि एक दशक बाद डिफेंस पवेलियन की वापसी इस मेले में नए आयाम जोड़ती है। उन्होंने बताया कि भारत की तेजी से बढ़ती जीडीपी, विविध क्षेत्रों में आर्थिक प्रगति और रोजगार सृजन ने देश को निवेश के लिए सुरक्षित एवं स्थिर गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। भारत विभिन्न देशों के साथ नए-नए एफटीए कर रहा है, जिससे व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत निकट भविष्य में दुनिया का “स्किल कैपिटल” बनेगा।
अपने स्वागत भाषण में आईटीपीओ के सीएमडी श्री नितिन कुमार यादव ने बताया कि यह मेला व्यवसायिक साझेदारी, तकनीकी विनिमय और निवेश सहयोग के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच बन चुका है। इस बार 3500 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। 31 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हुए हैं, जिसमें बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश “पार्टनर स्टेट” हैं, जबकि झारखंड को “फोकस स्टेट” बनाया गया है। वहीं 11 देशों—चीन, यूएई, मलेशिया, तुर्किये, स्वीडन, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, मिस्र सहित कई अन्य—ने अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
मेले में सरकारी विभागों, पीएसयू, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और विदेशी प्रदर्शकों की व्यापक भागीदारी यह दर्शाती है कि IITF वैश्विक व्यापार, टेक्नोलॉजी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रमुख मंच बन चुका है। जूट, खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कोयर, ग्रामीण उद्योग और पारंपरिक कलाओं से जुड़े संगठनों ने भी अपनी उपलब्धियों को प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे भारतीय परंपरा की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
अंत में आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक डॉ. नीरज खरवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।







