नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब सरकार डेटा, तकनीक और विज्ञान को हथियार बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार एक ऐसी सालभर चलने वाली व्यापक रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम डेटा और बहु-एजेंसी समन्वय की अहम भूमिका होगी। इसी दिशा में सरकार IIT कानपुर के साथ संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि प्रस्तावित सहयोग के तहत एक AI-सक्षम निर्णय समर्थन प्रणाली (Decision Support System) विकसित की जाएगी, जिससे प्रदूषण के स्रोतों की हाइपरलोकल स्तर पर पहचान की जा सकेगी। इसमें सेंसर आधारित मॉनिटरिंग, सैटेलाइट डेटा और एडवांस एनालिटिक्स का इस्तेमाल होगा, ताकि प्रदूषण से शहर के औसत आंकड़ों के बजाय उसके मूल स्रोत पर ही कार्रवाई की जा सके।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली अब “रिएक्टिव” उपायों से आगे बढ़कर डेटा-ड्रिवन और परिणाम आधारित मॉडल अपनाने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण कोई मौसमी अभियान नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए 365 दिन का एक्शन फ्रेमवर्क जरूरी है, जिसमें तकनीक, प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियां एक साझा प्लेटफॉर्म पर मिलकर काम करें।
इस रणनीति का एक अहम स्तंभ होगा डायनेमिक सोर्स अपॉर्शनमेंट, जिसके जरिए यह वैज्ञानिक रूप से तय किया जा सकेगा कि प्रदूषण में धूल, वाहन, उद्योग, कचरा जलाना या क्षेत्रीय कारणों का कितना योगदान है। इससे बिना वजह के प्रतिबंधों के बजाय सटीक और समयबद्ध कार्रवाई संभव हो पाएगी।
मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जब सभी एजेंसियां एक ही वैज्ञानिक डेटा के आधार पर काम करेंगी, तो कार्रवाई तेज, सटीक और प्रभावी होगी। यही सोच दिल्ली को “फायरफाइटिंग” से निकालकर स्थायी समाधान और रोकथाम की ओर ले जाएगी।
दिल्ली सरकार एक साथ चार मोर्चों पर सख्त कार्रवाई कर रही है—वाहन प्रदूषण, सड़क और निर्माण से उठने वाली धूल, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग और कचरा प्रबंधन। निर्माण स्थलों पर सख्त डस्ट नॉर्म्स लागू किए गए हैं, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, एंटी-स्मॉग गन और इलेक्ट्रिक पोल्स पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम के जरिए हवा में मौजूद कणों को कम किया जा रहा है। वहीं, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट और मंडलायुक्त स्तर पर सर्वे और बंदी की कार्रवाई जारी है। लैंडफिल साइट्स पर बायो-माइनिंग के जरिए रोजाना करीब 35 मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटान किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही 250 छोटे और 92 बड़े निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों का निरीक्षण किया गया, 6 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों की सफाई की गई, करीब 1,700 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव हुआ और 7 हजार से ज्यादा वाहनों के चालान काटे गए। साथ ही, 41 ट्रैफिक जाम बिंदुओं को क्लियर किया गया और जनता से मिली शिकायतों का समाधान भी किया गया।
दिल्ली सरकार ने दोहराया कि वह श्रेष्ठ वैज्ञानिक विशेषज्ञता, मजबूत संस्थागत ढांचे और पारदर्शी जवाबदेही के साथ आगे बढ़ते हुए राजधानी के नागरिकों को हर साल साफ हवा देने के लिए प्रतिबद्ध है। IIT कानपुर के साथ सहयोग और उसके क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत जानकारी औपचारिक चर्चा के बाद साझा की जाएगी।





