( स्वयंसेवी संगठन उदिशा ने आयोजित किया बाल शोषण की रोकथाम व मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान: 2000 छात्र, शिक्षक और अभिभावकों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। लगभग 500 से अधिक प्रतिभागियों ने दूसरे दिन “द डिजिटल डबल-एज्ड स्वोर्ड: इज़ सोशल मीडिया बून और बेन?” तथा “सतर्क ऑनलाइन व्यवहार” विषय पर हुए इंटरेक्टिव काउंसलिंग सत्र में भाग लिया। )
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद से संबद्ध स्वयंसेवी संस्था – उदिशा, पिछले 21 वर्षों से बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा और शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियान में भागीदार है। इस वर्ष, दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत एल.बी.एस. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर -3 आर के पुरम में स्वास्थ्य जांच शिविर, मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श सत्र और पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 2000 छात्र, शिक्षक और अभिभावकों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। लगभग 500 से अधिक प्रतिभागियों ने दूसरे दिन “द डिजिटल डबल-एज्ड स्वोर्ड: इज़ सोशल मीडिया बून और बेन?” तथा “सतर्क ऑनलाइन व्यवहार” विषय पर हुए इंटरेक्टिव काउंसलिंग सत्र में भाग लिया।
उदिशा के संस्थापक अध्यक्ष राकेश गौड़ ने वुमेन्स वर्ल्ड समिट फाउंडेशन, जिनेवा की बच्चों के प्रति हिंसा और शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभियान तथा एल.बी.एस. स्कूल के इस कार्यक्रम को आयोजित करने में सहयोग के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी और कार्यक्रम में भाग लेने वाले अतिथि वक्ताओं, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों का स्वागत किया।उन्होंने कहा कि बाल शोषण की रोकथाम, समय की आवश्यकता है।
पहला काउंसलिंग सत्र दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित किया गया। यह सत्र नई दिल्ली जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण द्वारा नामित अनुभवी लीगल काउंसिल लवदीप गौड़ द्वारा संचालित किया गया। सत्र की शुरुआत परिचय से हुई, जिसमें दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कानूनी जागरूकता को बढ़ाने और समाज को डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़िम्मेदार उपयोग के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। लीगल काउंसिल ने ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल शिष्टाचार की मूलभूत अवधारणाएँ समझाईं, जिससे प्रतिभागी लाभकारी और हानिकारक ऑनलाइन गतिविधियों के बीच अंतर समझ सकें। “डिजिटल डबल-एज्ड स्वोर्ड” की अवधारणा पर विशेष ज़ोर दिया गया, जहाँ एक तकनीक जो सशक्त बनाती है, वही उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों औरअन्य संवेदनशील वर्गों को साइबरबुलिंग, प्राइवेसी के उल्लंघन और ऑनलाइन शोषण जैसे ख़तरों के प्रति जागरूक भी करती है।
दूसरा सत्र सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री वरुणा द्वारा लिया गया, जो वर्तमान में ‘हक़ – चाइल्ड राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन’ में टीम लीड हैं और जिनका विषय था – सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव। उन्होंने बताया कि बच्चों द्वारा सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं, जैसे बढ़ती हुई चिंता और तनाव, आत्म-सम्मान में कमी और शारीरिक छवि को लेकर नकारात्मकता, लत लगना और आत्म-नियंत्रण में कमी, नींद में बाधा, साइबरबुलिंग एवं ऑनलाइन उत्पीड़न, “कनेक्टेड” होते हुए भी सामाजिक अलगाव, भावनात्मक दूरी, तथा निजता के जोखिम और पहचान के दुरुपयोग की आशंका। पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता: जागरूकता अभियान के एक हिस्से के रूप में मोबाइल और डिजिटल गेमिंग एडिक्शन विषय पर पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने अत्यंत रचनात्मक और विचारोत्तेजक पोस्टर बनाए। सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को पुरस्कृत किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन हेतु मेरिट सर्टिफिकेट और टी-शर्ट दिए गए। काउंसलिंग सत्र के दौरान ये पोस्टर कॉन्फ़्रेंस हॉल में प्रदर्शित किए गए, जिन्हें प्रतिभागियों द्वारा इस सामाजिक समस्या के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता एवं चिंता के लिए खूब सराहा गया।
दिल्ली से विजय गौड़ ब्यूरो चीफ की विशेष रिपोर्ट





