लड़कियों की उड़ान को पंख दें और एक सुरक्षित वातावरण दे : ममता कुमारी सदस्य राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार

केआईआईटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन् , केआईआईटी इंजीनियरिंग एवं भागीदारी जन सहयोग समिति ने साथ मिलकर ‘महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा की रोकथाम’ पर एक कार्यशाला का आयोजन केआईआईटी परिसर, सोहना रोड, गुरुग्राम में किया ।

इस अवसर ओर ज्योति प्रज्वलित कर अपने अध्यक्षीय भाषण में मदरलैंड वॉइस के ब्यूरो चीफ एवं अध्यक्ष भागीदारी जन सहयोग समिति ने कहा कि महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार की रोकथाम में ज़रूरी है कि महिलायें अत्याचार के ख़िलाफ़ अपनी चुप्पी तोड़े, आवाज उठाएँ और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बने , यही समय की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि हम मूक दर्शक बनकर अत्याचार देखते है , यही कारण है कि पर्याप्त गवाहियों के अभाव में अपराधी कोर्ट से बरी हो जाते है एक चुटकी लेते हुए लैंगिक मतभेद का उल्लेख करते हुए विजय गौड़ ने कहा कि बिटिया को बेटा कहने पर लड़की खुश होती है किंतु लड़के को बेटी कहने पर जो बुरा मानते थे वे अपनी प्रेमिका अथवा पत्नी के सम्बोधन बेबी कहने पर खुश हो जाते है जो इस असमानता के समाप्त होने की तरफ़ एक दिलचस्प संकेत है।

मुख्य अतिथि ममता कुमारी सदस्य राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार ने महिलाओं के विरुद्ध अपराध के विभिन्न मामलों और उनसे निपटने के उपायों का संक्षिप्त विवरण दिया। उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के बढ़ते मामलों और समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि आज माइंड सेट को रचनात्मक मोड़ देने की आवश्यकता है शादी से पहले दोनो को परस्पर समझने का अवसर देना चाहिये तभी शादी सफल हो सकती है ममता कुमारी ने कहा कि लड़कियों की उड़ान को पंख दें और एक सुरक्षित वातावरण दे ।

विशेष अतिथि डॉ0 नीरजा चतुर्वेदी आर जे एफ़एम रेन्बो आकाशवाणी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में, इंटरनेट संचार, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अपार अवसर प्रदान करता है, हालाँकि, यह महिलाओं के खिलाफ साइबर हिंसा का एक मंच भी बन गया है, जिसमें उत्पीड़न, पीछा करना, ट्रोलिंग, धमकाना, पहचान की चोरी और बिना सहमति के व्यक्तिगत जानकारी या छवियों को साझा करना शामिल है। इस तरह के कृत्य न केवल निजता का उल्लंघन करते हैं, बल्कि मनोवैज्ञानिक नुकसान, भय और सामाजिक अलगाव का कारण भी बनते हैं। इसलिए महिलाओं को इन खतरों से बचाने के लिए साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोशल साइट्स/मीडिया का उपयोग करते समय सरल कदम और सुरक्षा उपाय भी सुझाए।

डॉ. नीलिमा कामरा, रजिस्ट्रार, कॉलेज समूह और केडब्ल्यूएस स्कूल की प्रिंसिपल, प्रो. इंदिरा ढुल, निदेशक, केआईआईटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन और डॉ. सीमा श्रीवास्तव, प्रोफेसर, केआईआईटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन भी महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण और समाज में उनके हितों और सम्मान की रक्षा में समाज की भूमिका से संबंधित मुद्दों पर श्रोताओं को संबोधित किया । डॉ. महावीर सिंह, प्राचार्य, केआईआईटी ऑफ इंजीनियरिंग, डॉ. अंशु राधा अग्रवाल, प्राचार्य, केआईआईटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, संकाय सदस्य, छात्र और समुदाय के प्रतिनिधि इस इंटरैक्टिव सत्र में भाग लिया , जिसने लैंगिक समानता और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए केआईआईटी की प्रतिबद्धता की पुष्टि को इंगित कर रहा था । कार्यक्रम डॉ. नीलिमा कामरा, रजिस्ट्रार, कॉलेज ऑफ कॉलेजेज और प्रिंसिपल केडब्ल्यूएस स्कूल के कुशल मार्गदर्शन में किया जाएगा।
कार्यक्रम की संयोजिका प्रोफ़ेसर सीमा श्रीवास्तव केआईआईटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन एवं प्रोफ़ेसर कनिका कौर केआईआईटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य घरेलू हिंसा के कारणों, परिणामों और निवारक उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, साथ ही प्रतिभागियों को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने में योगदान देने के लिए सशक्त बनाना है।
इस अवसर पर मीडिया साझीदार मदरलैंड वॉइस , समाचार वार्ता , करेंट सेनेरीयो और दिल्ली और दिल्ली दैनिक का भी विशेष आभार व्यक्त किया गया।
दिल्ली से ब्यूरो चीफ विजय गौड़ की विशेष रिपोर्ट

  • Leema

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