दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि संवाद ही लोकतंत्र की आत्मा है और विधानसभा इसका सबसे सशक्त मंच है, जहां बहस, चर्चा और विमर्श के माध्यम से शासन की दिशा तय होती है। वे आज ऐतिहासिक दिल्ली विधानसभा में अंतर-राज्य युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत राजस्थान से आए युवाओं के साथ संवाद कर रहे थे।
इस अवसर पर राजस्थान के दौसा, सीकर, भरतपुर, झुंझुनूं और अलवर जिलों से आए करीब 40 युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम ‘माय भारत’ (MYBharat) द्वारा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत जिला युवा अधिकारी कार्यालय, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के माध्यम से और द्वारका स्थित सीसीआरटी के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत युवाओं को दिल्ली विधानसभा के संसदीय परंपराओं से परिचित कराया गया।
अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह भवन लोकतंत्र का मंदिर है, जहां जनता सर्वोच्च होती है और उनके चुने हुए प्रतिनिधि संवाद के माध्यम से नीतियों और कानूनों का निर्माण करते हैं। उन्होंने प्राचीन राजतांत्रिक व्यवस्थाओं और आधुनिक संसदीय लोकतंत्र के बीच अंतर समझाते हुए बताया कि आज सरकारें जनता की सेवा के लिए होती हैं। उन्होंने राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किए जाने को लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक दायित्व की भावना का प्रतीक बताया।
श्री गुप्ता ने संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधानसभा वह मंच है, जहां जनप्रतिनिधि जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर कानून बनाते हैं और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव संवाद और विचार-विमर्श है।
दिल्ली विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह भवन 113 वर्षों से लोकतांत्रिक परंपराओं का साक्षी रहा है। 1911 में राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के बाद 1912 से इस भवन में विधायी कार्य आरंभ हुआ। उन्होंने कहा कि गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय और प्रथम निर्वाचित भारतीय स्पीकर श्री वीर विठ्ठलभाई पटेल जैसे महान नेताओं का इस सदन से गहरा जुड़ाव रहा है और स्वतंत्रता आंदोलन में इस भवन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने विधानसभा अध्यक्ष से सीधे संवाद किया और अपने अनुभव तथा सीख साझा की। इसके अलावा प्रतिभागियों को दिल्ली विधानसभा का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें सदन की कार्यप्रणाली, प्रक्रियाओं और ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई।





