लोक नायक अस्पताल और ज़िला सामाजिक कल्याण कार्यालय (सेंट्रल) के संयुक्त प्रयास से बुधवार, 10 दिसंबर 2025 को सुगम्य सहायक योजना के तहत एक दिव्यांगजन सामान्य/मूल्यांकन शिविर का सफल आयोजन किया गया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस शिविर में सैकड़ों लाभार्थियों ने एक ही स्थान पर चिकित्सा मूल्यांकन, प्रमाणपत्र, पंजीकरण और परामर्श जैसी सुविधाएँ प्राप्त कीं।
शिविर का उद्घाटन लोक नायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. बी. एल. चौधरी ने किया। इस अवसर पर जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी (सेंट्रल) श्री शरद कुमार, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जे. के. बसु, तथा डिसेबिलिटी बोर्ड की प्रभारी डॉ. कुमुद भारती सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ डॉक्टर, पुनर्वास विशेषज्ञ और सहभागी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
शिविर में कुल 359 दिव्यांगजन पहुंचे, जिनमें से 230 व्यक्तियों का चिकित्सा मूल्यांकन कर दिव्यांग प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड हेतु प्रक्रियाएँ पूरी की गईं। वहीं 21 लाभार्थियों को एएलआईएमसीओ के माध्यम से सुगम्य सहायक योजना में पंजीकृत किया गया, ताकि उन्हें आगे चलकर जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें।
शिविर में लोक नायक अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सीय जांच, मौके पर ही दस्तावेज़ संबंधी सहायता, सहायक उपकरणों के लिए पंजीकरण, पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी, परामर्श और जागरूकता सेवाएँ प्रदान की गईं। विभिन्न एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने भी सक्रिय रूप से कैंप का हिस्सा बनकर लाभार्थियों को मार्गदर्शन दिया।
डॉ. बी. एल. चौधरी ने सहयोगी विभागों के सम्मिलित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर दिव्यांगजन के लिए समय पर मूल्यांकन, प्रमाणन और पुनर्वास सुनिश्चित करते हैं, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। डॉ. जे. के. बसु ने कहा कि इस तरह की पहलों से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ और समावेशी बनाया जा सकता है। वहीं डॉ. कुमुद भारती ने शिविर के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लाभार्थियों को प्रमाणन एवं यूडीआईडी प्रक्रियाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध कराई।
जिला सामाजिक कल्याण अधिकारी श्री शरद कुमार ने बताया कि सुगम्य सहायक योजना दिव्यांगजन को समय पर सहायक उपकरण और आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और सेवा वितरण की गति को तेज बनाती है।
दिन भर चले इस शिविर में चिकित्सा टीमों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे संपूर्ण प्रक्रिया सहज, संवेदनशील और सुचारू रूप से संपन्न हुई। आयोजन टीम ने सभी सहभागी एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे, ताकि दिव्यांगजन को समाज में सम्मान, सुविधा और समान अवसर प्राप्त हों।





