कात्यायनी ट्रस्ट,अलकनंदा,दिल्ली के स्थानीय पूजा समिति द्वारा आयोजित सरस्वती पूजा समारोह में भक्ति के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान पंडाल परिसर में एक विशेष हेल्थ चेकअप कैंप लगाया गया, जहाँ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मुफ्त ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराई।
इसके अतिरिक्त, अग्निशमन विभाग के विशेषज्ञों ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘मॉक ड्रिल’ के माध्यम से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आग लगने पर बचाव के तरीके और फायर एक्सटिंग्विशर चलाने का लाइव प्रदर्शन किया। समिति के सदस्यों ने बताया कि उत्सव के दौरान जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य था।
• भक्ति के साथ सुरक्षा का संगम: सरस्वती पूजा पंडाल में हुआ हेल्थ चेकअप और फायर सेफ्टी डेमो।
• सिर्फ उत्सव नहीं, जन-सेवा भी: पूजा समिति की अनूठी पहल, श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा पर जोर।
• ज्ञान की देवी की आराधना के बीच मिला सुरक्षा का मंत्र: फायर ब्रिगेड ने दी आग से बचाव की ट्रेनिंग।
“इस साल माँ शारदे की वंदना के साथ हमने मानवता और सुरक्षा की सेवा का संकल्प लिया है। स्वास्थ्य जांच शिविर और अग्निशमन प्रशिक्षण के माध्यम से श्रद्धालुओं को जागरूक करने की एक छोटी सी कोशिश की है, सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें! -ये कहना है इस संस्था के चेयमैन दीपक चक्रबर्ती का.
सरस्वती पूजा समारोह इस वर्ष केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सरोकार का केंद्र भी बना। विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना के साथ-साथ समिति ने जनहित में एक विशाल नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और अग्निशमन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।
पंडाल परिसर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में अनुभवी डॉक्टरों की टीम द्वारा 200 से अधिक श्रद्धालुओं की जांच की गई। शिविर में मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल और बीएमआई (BMI) की जांच की गई, साथ ही लोगों को बेहतर जीवनशैली के लिए चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया।
इसके अलावा सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।बढ़ती आगजनी की घटनाओं को देखते हुए, अग्निशमन विभाग के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने उपस्थित जनसमूह को बताया कि शॉर्ट सर्किट या गैस सिलेंडर से आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ से कैसे काम लिया जाए। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय युवाओं को फायर एक्सटिंग्विशर चलाने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। समिति के अध्यक्ष राजीब मोइत्रा ने कहा, “ज्ञान की देवी की पूजा का असली अर्थ जागरूकता फैलाना है। हम चाहते थे कि हमारे यहाँ आने वाला हर भक्त न केवल आशीर्वाद लेकर जाए, बल्कि अपनी सेहत और सुरक्षा के प्रति सजग होकर भी लौटे।”
इस अवसर पर समिति के सचिव अर्नब भट्टाचार्या सहित कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।







