मखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ जर्नलिज्म अंड कम्युनिकेशन आयोजित माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में पत्रकारिता के मूल्यों, साहस और बदलते स्वरूप पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद मिश्रा और प्रख्यात लेखक मनोज श्रीवास्तव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज पत्रकारिता में लोकहित से ज्यादा महत्वाकांक्षाएं हावी हो रही हैं।
अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि आजादी से पहले की पत्रकारिता में नैतिकता और समाज के प्रति समर्पण सर्वोच्च था, जबकि आज मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने मखनलाल चातुर्वेदी को केवल पत्रकार नहीं बल्कि एक योद्धा संपादक बताते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने देश की राजनीति, साहित्य और संस्कृति को नई दिशा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता में संस्थागत साहस की आज सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब शब्द सत्य से निकलते हैं, तो उनका प्रभाव किसी तोप से कम नहीं होता। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी के उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी लेखनी इतनी प्रभावशाली थी कि अंग्रेजों के समय एक कसाईखाने की योजना तक बंद करनी पड़ी।
कार्यक्रम में कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की विकास यात्रा में अच्युतानंद मिश्र के योगदान को याद किया। इस दौरान छात्रों द्वारा तैयार ‘विकल्प’ समाचार पत्र का विमोचन भी किया गया और एमपी ऑनलाइन की ओर से विश्वविद्यालय को ई-रिक्शा भेंट किया गया।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे, जहां पत्रकारिता के मूल्यों और उसकी जिम्मेदारियों पर गहराई से चर्चा हुई।






