_मालिनी श्रीवास्तव
सुरों की मल्लिका और भारतीय संगीत जगत की अनमोल धरोहर, आशा भोसले जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। आज संगीत के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है।
श्रद्धांजलि: सुरों की विदाई
सात दशकों तक अपनी जादुई आवाज़ से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा ताई अब हमारे बीच नहीं रहीं। शास्त्रीय संगीत से लेकर चुलबुले गानों और भावुक गजलों तक, उन्होंने हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
जीवन और उपलब्धियां
जन्म: 8 सितंबर 1933, सांगली (महाराष्ट्र)।
करियर: उन्होंने 1943 में अपना पहला गाना गाया और तब से लेकर अब तक 12,000 से अधिक गानों को अपनी आवाज़ दी।
विविधता: आशा जी ने केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि 20 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं में गायन किया।
सम्मान: उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2000) और पद्म विभूषण (2008) जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। उनका नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज है।
संगीत की विरासत
आशा जी ने ओ.पी. नैय्यर, आर.डी. बर्मन और खय्याम जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर भारतीय सिनेमा को ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘इन आँखों की मस्ती’ जैसे कालजयी गीत दिए।
“उनकी आवाज़ में वो खनक और ऊर्जा थी, जो हर पीढ़ी के दिल को छू जाती थी। संगीत का यह कोहिनूर हमेशा हमारी यादों और गीतों में जीवित रहेगा।”
ईश्वर आशा भोसले को सिर्फ एक बार ही गढ़ता है
अब आशा दुबारा धरती पर नहीं आएँगी लेकिन हर चाहने वालों की दिलों में एक याद बन कर ,धड़कती
रहेगी
शत्-शत् नमन।






