नई दिल्ली।
44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में इस बार फोकस स्टेट बिहार अपनी कला, संस्कृति और विरासत को एक नए अंदाज़ में पेश कर रहा है। पवेलियन में पहुंचने वाले लोगों का सबसे पहले स्वागत होता है मधुबनी की रंगों से भरी दीवारों और कलाकारों की लाइव पेंटिंग से, जो हर किसी को अपनी तरफ खींच रही है।
यहाँ बिहार के लोक कलाकार न सिर्फ अपनी मधुबनी पेंटिंग्स, बल्कि हस्तनिर्मित मिट्टी के शिल्प, लकड़ी के बर्तन, पिपरही आर्ट, सिक्की क्राफ्ट और कई पारंपरिक हस्तशिल्प बनाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।
सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है बिहार का लोक-सांस्कृतिक मंच, जहाँ कलाकार रोज़ फगुआ गीत, भोजपूरी लोकगीत और मिथिला क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य प्रस्तुति दे रहे हैं।
दर्शक जहां लाइव आर्टवर्क को हाथों-हाथ खरीद रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए रुक रहे हैं।
हर उम्र के लोग—बच्चे, युवा, परिवार—सब बिहार के इस सांस्कृतिक प्रस्तुतिकरण से बेहद प्रभावित नज़र आ रहे हैं।
बिहार पवेलियन की यह कोशिश है कि लोग न सिर्फ खरीदारी करें बल्कि बिहार की जड़ों, परंपराओं और कारीगरों की मेहनत से सीधा जुड़ाव महसूस करें। फेयर में आने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटक बिहार की कला और संस्कृति को ‘ग्लोबल स्टेज’ पर देखने का अनुभव लेते दिखाई दे रहे हैं







