25/08/2018    दलितों ने हताश होकर अब केजरीवाल से लगाई गुहार - राजेन्द्र पाल गौतम
शनिवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आप के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री (दिल्ली सरकार) राजेन्द्र पाल गौतम ने बताया कि 8 अगस्त से देश के 8 राज्यों की 154 जगहों पर अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा के हज़ारों कार्यकर्ता भूख-हड़ताल पर बैठे हैं।

उनकी भूख हड़ताल को 18 दिन हो गए हैं। लेकिन ये बड़े ही दुःख की बात है कि किसी भी मीडिया चैनल या अख़बार ने इस खबर को गंभीरता से नहीं लिया।

केवल डीडवाना राजस्थान में एक स्थान पर लगभग 5 हज़ार लोग हड़ताल पर बैठे हुए हैं, इसी तरह और कई अलग-अलग स्थानों पर अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा के कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे है, लेकिन ना तो केंद्र सरकार ने और ना ही राज्य सरकार ने उनकी सुध लेने की कोशिश की, केवल एसडीएम ने उनसे मुलाकात की, किसी डीएम तक ने उनकी समस्याएँ सुनना ज़रूरी नहीं समझा।

केंद्र सरकार और देश के विभिन्न राज्यों की सरकारों से हताश होकर अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा ने आम आदमी पार्टी में अपना विश्वाश दिखाते हुए, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जी को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया, और पत्र के माध्यम से आग्रह किया कि वो राजस्थान आएं, और 18 दिन से चल रही भूख हड़ताल को ख़त्म करवाएं और साथ ही साथ ये भी आग्रह किया कि उनकी समस्याओं को केंद्र सरकार के कानों तक पहुचाने में उनकी मदद करें।

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी उन लोगों को आश्वासन दिया है कि उनके जो विकास के मुद्दे है, सभी को समान अधिकारों की बात है उसे देश की जनता के सामने पुरजोर तरीके से उठाएँगे, और केंद्र सरकार तक उनकी मांगो को पहुंचाने का पूरा प्रयास करेंगे।

राजेन्द्र पाल गौतम ने बताया कि अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा के कार्यकर्ताओ की मांग है कि “हमें भीख नहीं भागीदारी चाहिए, देश के हर क्षेत्र में हिस्सेदारी चाहिए”। सरकार इन लोगों को क्या दे क्या ना दे, ये तो बाद का पहलू है, परन्तु जनता का प्रतिनिधि होने के नाते कम से कम राज्य सरकारें इनसे आकर मिले तो सही, इनकी बात तो सुनें।

आज देश के हालत बद से बदतर हो गए हैं। आज से 25 साल पहले ये स्तिथि नहीं थी जो देश में आज हो गई है, और ये सब केंद्र और राज्य सरकारों की अनदेखी और आलसपन का नतीजा है।

देश में पैदा हुई इन समस्याओं का कारण है सभी को उपलब्ध संसाधनों के समान लाभ नहीं मिलते। सरकार ने उपलब्ध संसाधनों का निजीकरण करके सभी लाभ केवल कुछ ही व्यक्तियों तक सीमित कर दिए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि ऐसी नीतियाँ बनाएं जिससे देश के प्रत्येक नागरिक को उनका समान लाभ मिल सके, और सभी लोग समान रूप से तरक्की कर सकें।



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