08/03/2019    मनीष सिसोदिया गेस्ट टीचरों की मांगों को लेकर संवेदनहीन है - मनोज तिवारी
नई दिल्ली, 08 मार्च। केजरीवाल सरकार 22000 गेस्ट टीचरों को नियमित करने को लेकर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। कल दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी सभी गेस्ट टीचरों से मिले और उनकी समस्याओं व दर्द को समझते हुए कहा कि हरियाणा सरकार की गेस्ट टीचरों को नियमित करने की पॉलिसी दिल्ली के गेस्ट टीचरों पर भी लागू होनी चाहिए दिल्ली भाजपा इसका पूर्ण समर्थन करेगी।

गेस्ट टीचरों की समस्याओं को लेकर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आज दिल्ली के उपराज्यपाल से मिलकर उनको गेस्ट टीचरों की समस्याओं से अवगत कराया। तिवारी ने कहा कि उपराज्यपाल कार्यालय से जानकारी उन्हें मिली है कि आज 12ः30 बजे दिल्ली सरकार की तरफ से एक लेटर प्राप्त हुआ है। इसे लेटर इसलिए कहेंगे क्योंकि बिना लॉ डिपार्टमेंट की वैटिंग के एवं बिना सर्विसेस डिपार्टमेंट को जानकारी दिए हुए दिल्ली सरकार ने पल्ला झाड़ते हुए दो पेज का लेटर उपराज्यपाल को दिया है। गेस्ट टीचर का मामला न्यायालय में है दिल्ली सरकार को लॉ डिपार्टमेंट से लीगल, सर्विसेज से परामर्श के साथ पहले पॉलिसी बनानी चाहिए। गेस्ट टीचर को गुमराह कर बताया गया है कि हमने कर दिया है लेकिन केंद्र सरकार उसे रोक रही है। केजरीवाल सरकार का बार-बार झूठ बोलना दिल्ली की जनता के बीच आ चुका है। सवाल उठता है कि जब केजरीवाल सरकार को पता था कि 28 फरवरी को कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहा है  तो उन्होंने जानबूझकर गेस्ट टीचरों के बीच में सर्विस में गैप की स्थिति क्यों पैदा की गई।  31 अगस्त, 2019 तक गेस्ट टीचर की सेवाएं सुचारू रूप से जारी रहेंगी। गेस्ट टीचर के साथ न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए दिल्ली भाजपा उनके साथ हर कदम पर खड़ी है।

 तिवारी ने कहा कि गेस्ट टीचर्स पर राजनीति कर केजरीवाल दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को ठप करना चाहते है। शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वाले केजरीवाल सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया गेस्ट टीचरों की मांगों को लेकर संवेदनहीन है। 

 तिवारी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देश में जल्द आचार संहिता लागू होने वाली है ऐसे में दिल्ली सरकार के इस निर्णय से दिल्ली सरकार की मंशा पर सवाल उठता है। दिल्ली सरकार को पहले से ही पता था कि 28  फरवरी को गेस्ट टीचरों का काकॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो रहा है।  सवाल ये उठता है कि दिल्ली सरकार गेस्ट टीचरों की मांग को लेकर सजग रहती और समय से पूर्व  कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू कर देती तो  दिल्ली के शिक्षा व्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचता। मीडिया में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार  पहले भी कई बार ऐसा कर चुकी है। दिल्ली के गेस्ट  टीचरों के हितों से केजरीवाल सरकार का कोई सरोकार नहीं है वह केवल इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।


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