11/06/2016  जयंत सिन्हा ने कहा क्रूड 60 डॉलर के ऊपर गया तो होगी मुश्किल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम एक बार फिर बढ़ रहे हैं। फिलहाल यह 52 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है जो 11 महीने में सबसे ज्यादा है। ऐसे में सरकार का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमत 60 डॉलर के भीतर रहती है तो इससे महंगाई और वित्तीय मोर्चे पर मुश्किल नहीं आएगी। लेकिन क्रूड का इससे महंगा होना चिंताजनक साबित होगा। क्रूड ऑयल महंगा होने से आयात बिल बढ़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे। ईंधन महंगा होने से महंगाई दर में इजाफा होगा। ज्यादा आयात खर्च से सरकारी घाटा बढ़ेगा। इससे जीडीपी ग्रोथ रेट भी कम हो जाएगी।  वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने विशेष बातचीत में यह बात कही। पिछले हफ्ते वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा था कि क्रूड की मौजूदा कीमत से भारत निपट सकता है। लेकिन दाम ज्यादा बढ़े तो इससे इकोनॉमी और महंगाई पर असर होगा। इससे पहले विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने से भारत को काफी फायदा हुआ था। आयात बिल कम हुआ और महंगाई घटाने में भी मदद मिली। लेकिन पांच महीने में क्रूड 70% महंगा हो चुका है। विश्व बैंक ने पहले इस वर्ष क्रूड की औसत कीमत 37 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान व्यक्त किया था। लेकिन अब उसने इसे बढ़ाकर 41 डॉलर कर दिया है। 
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