राष्ट्रीय (27/07/2016) 
अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच

ओजस्वी पार्टी के नेताओं की हिन्दी में प्रस्तुत की याचिका संख्या 434/15 का अंग्रेजी अनुवाद देने से मना करने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा खारिज कर दी गयी। इस मामले पर अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश कौशिक जी की अध्यक्षता में हिन्दू महासभा में हुई बैठक में इसे हरित अधिकरण की गुंडागर्दी बताया।बैठक में अखिल भारतीय अंग्रेजी अनिवार्यता विरोधी मंच के महामंत्री और ओजस्वी पार्टी के राजनीतिक सलाहकार श्री मुकेश जैन ने कहा कि हरित अधिकरण में राजभाषा नियमों के तहत हमने हिन्दी में याचिका प्रस्तुत की थी।इस मामले में हमें 21 मार्च को हरित अधिकरण ने आदेश दिया की इस याचिका का अंग्रेजी अनुवाद दिया जाये। जिसके खिलाफ हमने राजभाषा विभाग में शिकायत की कि हरित अधिकरण में राजभाषा नियमों की सरासर अवहेलना की जा रही हैं। श्री जैन ने कहा  इस अवहेलना के पीछे हरित अधिकरण में अंग्रेजी दां अफसरों और हिन्दी विरोधी न्यायधीशों की एक तरफा भरती जारी रखने का भ्रष्टाचार काम कर रहा है। हिन्दी भाषी दिल्ली क प्रदेश में होने के कारण राजभाषा नियमों के तहत हरित अधिकरण का 100 प्रतिषत काम हिन्दी में होना जरूरी है। किन्तु सोनिया गांधी के इशारे पर सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के उन न्यायधीशों की अधिकरण में नियुक्ति सम्बन्धी कानून बनाया गया जो न केवल कानून से खिलवाड करने में माहिर हैं बल्कि हिन्दी में काम करना अपनी तौहिन समझते हैं। यही कारण है कि राजभाषा विभाग द्वारा पर्यावरण मंत्रालय को 21 अप्रेल और 24 मई को लिखा पत्र हरित अधिकरण के अष्यक्ष श्री स्वतन्त्र कुमार द्वारा राजभाषा नियमो का ल्रातार उल्लंघन ने श्री स्वतन्त्र कुमार के गुस्से को और भडका दिया और श्री स्वतन्त्र कुमार ने 11 जुलाई को अपने आदेश में लिखा कि यदि ओजस्वी पार्टी ने 26 जुलाई तक उक्त याचिका का अंग्रेजी अनुवाद नहीं दिया तो इसे खारिज कर दिया जायेगा।बैठक में स्वामी ओम जी ने राजभाषा विभाग से अनुरोध किया कि यह मसला अब सामान्य मसला नहीं है। यह राजभाषा हिन्दी के सम्मान और माननीय राष्ट्रपति जी के हिन्दी के विकास के लिये दिये गये आदेशों की रक्षा का मामला है। सरकार को अब अपने तरीके से ही इस अदने से हरित अधिकरण द्वारा की जा रहे संविधान विरोधी गुंडागर्दी और बगावत का जवाब देना होगा।
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