राष्ट्रीय (29/07/2016) 
मनोहर सरकार की ईमानदारी पर उठे सवाल?

कागजों मे आधारित सोसाइटी को दी पाँच लाख की ग्रांट 
मुख्यमंत्री ने बिल्डिंग मेंटिनेस और लाइब्रेरी के नाम पर दी ग्रांट
लेकिन जिस यधुवंशी सोसाइटी फॉर एजुकेशन मिशन संस्था को दी ग्रांट वो अस्तित्व मे नही 
नई अनाज मंडी मे दुकान नंबर  52 मे दर्शाई गई सोसाइटी लेकिन वहाँ कोई सोसाइटी नही 
डीसी यश गर्ग ने कहा मामला जानकारी मे नही ,जांच के बाद करेंगे कारवाई 
रेवाड़ी, 29 जुलाई।एंकर: मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की ईमानदारी की भले विपक्षी दल तारीफ करते नही थकते हो, लेकिन मनोहर सरकार पर उनके अपने ही भरष्टाचार का दाग लगाने मे पीछे नही है। ये हम इसलिए कहे रहे है, क्योंकि रेवाड़ी मे मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी ही एक संस्था को दी गई ग्रांट आज अस्तित्व मे नही है।
रेवाड़ी की नई आनज मंडी स्थित हरकेश कुमार एन्ड सन्स शॉप नंबर 52 ये वही है, जहां कागजों मे यदुवंशी सोसाइटी फॉर एजुकेशन मिशन नाम की संस्था संचालित की जा रही है और सीएम साहब ने इस संस्था मे भवन सुधार और लाइब्रेरी के लिए 5 लाख की ग्रांट दी हुई है, लेकिन हकीकत में यहां ऐसी कोई संस्था मौजूद ही नही है।
खबर फास्ट के हाथ लगे दस्तावेजो मे 16 मार्च 2016 को राज्य सरकार के डवलपमेंट एंड पंचायत डिपार्टमेंट की ओर से इस ग्रांट को मंजूरी मिली और मई माह मे सोसाइटी को यह ग्रांट दे दी गई।
आपको बता दे कि नई अनाज मंडी में जिस शॉप नंबर 52 को कागजों मे दर्शाया गया है, उसमे आनज मंडी के व्यापारी बैठते है। इसी दुकान पर अनाज मंडी का दौरा करने आए प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा रुके थे और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव भी मंडी के दौरे के दौरान इसी दुकान पर रुके थे । जिससे साफ है की राजनीतिक रसुक वालों की ये दुकान है और उसी रसूक का फायदा उठाकर ग्रांट पास कराई होगी। दुकान मालिक दुकान पर तो नही मिले, लेकिन फोन पर दी जानकारी मे उन्होने बताया कि वो ऐसी कोई सोसाइटी को नही जानते और उन्होने कोई ग्रांट भी नही ली है।इस मामले मे जिला उपायुक्त यश गर्ग से जब पूछा गया तो उन्होने कहा कि मीडिया द्वारा ही ये मामला उनके संज्ञान मे आया है। मामले की जांच के बाद ही वो आगे कुछ बता पाएंगे। उन्होने कहा कि सभी सोसाइटी की फिजिकल वेरिफ़ीकेशन कारण संभव नही है। डॉक्यूमेंट और बैंक खाते के आधार पर ग्रांट अलोट कर दी जाती है।कागजों के आधार पर मिली जानकारी के बाद ये तो साफ हो गया कि बिना अस्तित्व मे रही सोसाइटी को फर्जी तरीके से ग्रांट दी गई है। ऐसे मे जांच उस दिशा मे होनी चाहिए कि आखिर किसकी सिफ़ारिश पर मुख्यमंत्री ने यदुवंशी सोसाइटी फॉर एजुकेशन मिशन संस्था को ग्रांट दी और जिन अधिकारियों के पास ग्रांट पास करने मे और ग्रांट अलोट करने तक की जिम्मेदारी होती है, उन्होने पहले सच्चाई क्यों नही पता की।
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