राष्ट्रीय (04/08/2016) 
हरियाली तीज 5 अगस्त और नागपंचमी 7 को
इस सप्ताह लगातार तीन त्योहार 5,7,18 और 24 तारीखों को पड़ रहे हैं जिनका धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक महत्व हमारे देश में आदिकाल से रहा है। राखी 18 तथा जन्माष्टमी 24 व 25 को होगी।
श्रावणी हरियाली तीज  5 अगस्त को - क्या है पारिवारिक ,सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व ?
श्रावणी शुक्ल मधुस्त्रवा ,हरियाली या सिंघारा तीज 5 अगस्त,  को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्रवार को पड़ रही है जो इस बार अत्यंत शुभ है। जिसे श्रावणी  तीज भी कहा जाता है। इस बार  तृतीया , 4 अगस्त की प्रातः 2 बजे आरंभ हो जाएगी तथा  6 अगस्त की प्रातः 02.42 तक रहेगी।  इस  दिन सुहागिनें मेंहदी लगाकर झूलों पर सावन का आनंद मनाती हैं। प्रकृति धरती पर चारों ओर हरियाली की चादर बिछा देती है और मन म्यूर हो उठता है। इसी लिए हाथों पर हरी मेंहदी लगाना प्रकृति से जुड़ने की अनुभूति है जो सुख समद्धि का प्रतीक है। इसके बाद वही मेंहदी लाल हो उठती है जो सुहाग, हर्षोल्लास एवं सौंदर्य का प्रतिनिधित्व करता है।
तीज वास्तव में यह एक ऐसा पर्व है जिसमें करवा चैथ जैसा श्रंृगार का वातावरण  है, महिला मुक्ति सा एहसास है, राखी एवं भाई दूज  जैसा पारिवारिक संगम है , मालपुओं व घेवर से दीवाली जैसी खुशबू है, होली सी उमंग है, प्रकृति की पूर्ण अनुकंपा है।
 जिस लड़की के ब्याह के बाद पहला सावन आता है, उसे ससुराल में नहीं रखा जाता । इसका कारण यह भी था कि नवविवाहिता अपने मां बाप से ससुराल में आ रही कठिनाइयों, खटटे् मीठे अनुभवों को सखी सहेलियों के साथ बांट सके और मन हल्का करने के अलावा कठिनाईयों का समाधान भी खोजा जा सके। इसी लिए  नवविवाहित पुत्री की ससुराल से सिंधारा आता है। और ऐसी ही समग्री का आदान प्रदान किया जाता है ताकि संबंध और मधुर हों और रिष्तेदारी प्रगाढ़ हो । इसमें उसके लिए साड़ियां, सौंदर्य प्रसाधन, सुहाग की चूड़ियां व संबंधित सामान के अलावा उसके भाई बहनों के लिए आयु के अनुसार कपड़े , मिष्ठान तथा उसकी आवश्यकतानुसार गीफट भेजे जाते हैं। आज जब छोटी छोटी बातों के कारण तलाक तक की नोबत आ जाती है तो वर्तमान युग में तीज  का त्योहार मात्र औपचारिकता निभाने की बजाए उसकी भावना और दिल से मनाना अधिक सार्थक होगा।
पूजन विधि
तीज से एक दिन पहले मेंहदी लगा ली जाती है। तीज के दिन सुबह स्नानादि करके श्रृंगार करके , नए वस्त्र  व आभूषण धारण करके गौरी की पूजा करती हैं। इसके लिए मिटट्ी या अन्य धातु से बनी शिवजी, पार्वती व गणेश जी की मूर्ति रख कर उन्हें वस्त्रादि पहना कर रोली, सिंदूर, अक्षत आदि से पूजन करती हैं। इसके बाद आठ पूरी, छ पूओं से भोग लगाती हैं।फिर यह बायना जिसमें चूड़ियां, श्रंृगार का सामान व साड़ी, मिठाई , दक्षिणा या षगुन राषि  इत्यादि अपनी सास, जेठानी, या ननद को देते हुए चरण स्पर्ष करती हैं। इसके बाद पारिवारिक भोजन किया जाता है। सामूहिक रुप से झूला झूलना,तीज मिलन, गीत संगीत, जलपान आदि किया जाता है। कुल मिला कर यह पारिवारिक मिलन का सुअवसर होता है।
इस दिन तीज पर तीन चीजें तजने का भी विधान है।
1. पति से छल कपट
2. झूठ - दुव्र्यवहार 
3. पर निन्दा
तीज पर ही गौरा विरहाग्रि में तपकर शिव से मिली थी। ये तीन सूत्र सुखी पारिवारिक जीवन के आधार स्तंभ हैं जो वर्तमान आधुनिक  समय में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।
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मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषविद्, 196, सैक्टर 20ए  चंडीगढ़, मो0- 98156 19620
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