12/09/2016  उत्तराखंड, बैंड और ढोल की गूँज मे विलुप्त हो रही, उत्तराखंड की लोक संस्कृति की धुन !

नैनीताल नंदा देवी महोत्सव मे उत्तराखंड की संस्कृति को संजोये कुछ छोलिया दलों से बात करने के बाद उनके दर्द का अहसास हुवा ! जगदम्बा छोलिया दल के मुखिया नारायण राम आर्य के अनुसार आज के दौर मे नये नये उपकरण आ गए है जैसे बैंड ढोल डीजे कैसियो और लोग भी इन्ही की मांग करते है अब तो छोलिया नृत्य वालो को कोई भी याद नहीं करता है!

नारायण ने बताया कि एक समय हुवा करता था जब उत्तरखंड मे कोई भी सांस्कृतिक प्रोग्राम हो या शादियों त्योहारों मे सभी जगह हमारी मांग होती थी और अच्छी खासी आमदनी भी हो जाती थी पर समय के साथ साथ अब तो हमारी मांग ना के बराबर हो गयी है अब तो हम लोग ऐसे ही मेलो मे या कोई सांस्कृतिक प्रोग्रामो मे चले जाते है और थोड़ी बहुत आमदनी हो जाती है ! यही वजह है कि अब धीरे धीरे लोग इस ब्यवसाय को छोड़कर दूसरे ब्यवसाय की तलाश मे शहरो की और पलायन कर रहे है !
छोलिया दल दन्या के मुखिया दान सिंह बोरा का कहना है कि बदलते दौर मे अब धीरे धीरे छोलिया दलों के प्रति लोगो का रुझान कम होते जा रहा है, जो चिंता का विषय है ! यहाँ पर आये सभी छोलिया दलों की एक ही पीड़ा है कि प्रशासन द्वरा भी इस तरफ कोई भी कदम नहीं उठाया जा रहा है इनकी मांग है कि  अगर सरकार इनकी कुछ सहायता करें तो इनका रोजगार बच सकता है और विलपुत हो रही संस्कृति को भी बचाया जा सकता है !
उत्तराखंड वासियो और सरकार दोनों के लिए यह एक सोचने का विषय है! कि इस तरफ कोई तो ठोस कदम उठाने चाहिए! जिससे की उत्तरखंड की संस्कृति  को बचाया जा सके ! साथ साथ इस ब्यवसाय को छोड़कर दूसरे ब्यवसाय की तलाश मे शहरो की और पलायन कर रहे परिवारों को  भी बचाया जा सके !
उत्तराखंड से संतोष बोरा की रिपोट !

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