03/07/2017  डवलपमेंट डायलॉग विद नीति आयोग राष्ट्रीय विकास एजडे मेे सक्रिय सहभागी होगा राजस्थान
राजस्थान की मुख्यमंत्राी श्रीमती वसुन्धरा राजे ने नीति आयोग की ओर से तैयार किए जा रहे राष्ट्रीय विकास एजडे म राजस्थान की एक सक्रिय सहभागी के रूप म प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन एवं सतत विकास के लिए राज्य सरकार केन्द्र के साथ मिलकर चिन्हित क्षेत्रों के विकास पर अधिक फोकस करेगी। 
श्रीमती राजे शुक्रवार को जयपुर में मुख्यमंत्राी कार्यालय में आयोजित डवलपमट डायलॉग विद नीति आयोग कार्यक्रम म नीति आयोग के सदस्यों और अधिकारियों को सम्बोधित कर रही थ। उन्होंने कहा कि राज्य को विरासत म मिलती आ रही समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए हम योजनाओं के निर्माण और क्रियान्विति म आयोग का मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़गे। 
मुख्यमंत्राी ने नीति आयोग द्वारा देश के सर्वसमावेशी और सर्वांगीण विकास के लिए 15 वर्ष तक की दूरदर्शी रणनीति बनाने के लिए केन्द्र और राज्य के बीच सहयोग से तैयार किए जा रहे तीन साल के एक्शन एजडा की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सर्विस डिलीवरी, प्रशासन तंत्रा म सुधार और बेहतर समन्वय म नीति आयोग की सहभागिता से न केवल हम राजस्थान का तेजी से विकास करगे, बल्कि दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकेंगे।
श्रीमती राजे ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान ने मुख्यमंत्राी जल स्वावलम्बन अभियान के रूप म ऐसी महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है जो राज्य का भविष्य सुरक्षित करने का काम करेगी। अभियान के पहले दो चरणों म 3500 तथा 4200 गांवों और लगभग 70 शहरों म वर्षाजल संग्रहण के ढ़ांचे बनाकर पानी को सहेजने की सफल क्रियान्विति की गई है। इस अभियान के परिणाम स्वरूप कई क्षेत्रों म भूजल स्तर तथा हरियाली क्षेत्रा बढ़ा है। 
मुख्यमंत्राी ने कहा कि अब अभियान के तीसरे और चौथे चरण म 6000 से अधिक गांवों म जल संग्रहण ढ़ांचे बनाए जाएंगे। उन्होंने इसके लिए केन्द्र सरकार से 3000 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता के साथ-साथ पर्यावरण मंत्रालय के ग्रीन क्लाइमेट फण्ड से भी धनराशि आवंटन के लिए नीति आयोग से समर्थन की मांग की। उन्होंने राजस्थान की 7.5 करोड़ जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार से 10 वर्ष के लिए 7 हजार 275 करोड़ रुपए के विशेष वार्षिक अनुदान की भी मांग की।
श्रीमती राजे ने राज्य की कृषि व्यवस्था म सुधार के माध्यम से खाद्यान्न एवं पोषण सुरक्षा तथा जलवायु सम्पोषणता सुनिश्चित करने के लिए भी कृषि मंत्रालय और केन्द्र के शोध संस्थानों का राज्य के किसानों के साथ तालमेल बढ़ाने और विशेष आवंटन की जरूरत को रेखांकित किया। उन्हांेने केन्द्र सरकार की ओर से महात्मा गांधी नरेगा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना सहित अन्य बजट स्वीकृतियों के समय पर भुगतान के साथ-साथ प्रधानमंत्राी फसल बीमा योजना की बकाया राशि के भुगतान म आयोग के सहयोग की अपेक्षा की।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अरविंद पनगड़िया ने कहा कि राजस्थान ने केन्द्र सरकार से भी पहले तीन वर्ष पूर्व ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए पहल की थी। उन्होंने कहा कि यहां बीते तीन वर्ष म श्रम कानूनों म बदलाव, भूमि सुधारों के तहत सौर ऊर्जा के लिए भूखण्ड लीज पर देने की अनुमति, नगरीय विकास के क्षेत्रा म किराया अधिनियम तथा स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण म अभूतपूर्व वृद्धि जैसे कई उल्लेखनीय सुधार हुए ह।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चन्द ने ई-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग परियोजना के तहत फसल उत्पादों के लिए सभी मंडियों म इलेक्ट्रॉनिक बोली व्यवस्था अनिवार्य रूप से शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने राज्य म विभिन्न फसलों की अधिक पैदावार वाली किस्मों को बढ़ावा देने तथा पशुपालन के विस्तार के लिए सामुदायिक भूमि के संरक्षण और उस पर हरियाली विस्तार करने के भी सुझाव दिए। उन्होंने कृषि सुधारों पर फोकस करते हुए संविदा खेती का बढ़ावा देने, निजी भूमि पर वानिकी विकास करने और अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों को हतोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत ने अपने प्रस्तुतीकरण म कहा कि राजस्थान सरकार की भामाशाह योजना देश के लिए एक मॉडल स्कीम है। उन्होंने जल स्वावलम्बन, श्रम सुधार, शिक्षा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और सिंचाई के क्षेत्रा म उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नवाचारों से राजस्थान देश का नम्बर वन स्टेट बन सकता है। 
इस अवसर पर राज्य मंत्राीमण्डल के सदस्य, मुख्य सचिव श्री ओपी मीना, मुख्यमंत्राी सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष श्री सीएस राजन, राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष श्रीमती ज्योति किरण शुक्ला सहित विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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