26/02/2018  रक्षा मंत्री ने परियोजना सीबर्ड, कारवार के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को सौंपे चेक

रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ऐसे लगभग 30 परिवारों (96 लोगों) को 5 करोड़ रुपये के चेक वितरित किए, जिनका ऑपरेशन सीबर्ड (नौसेना परियोजना) के अंतर्गत पुनर्वास किया जाना था। केंद्रीय मंत्री ने उन लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने सामरिक नौसेना बेस के विकास के लिए अपनी जमीन दे दी, जिससे भारत के पश्चिमी तट पर नौसेना की उपस्थिति मजबूत होगी। रक्षा मंत्रालय (एमओडी), भारत सरकार ने नौसेना बेस के निर्माण के उद्देश्य से कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तालुका कारवार और अंकोला के 13 गांवों में स्थित 2412 एकड़ 15 गुंटा 7 अनस निजी भूमि का अधिग्रहण किया था। 1988 से 2000 के बीच भूमि अधिग्रहण के समय भूमि के पूर्व मालिकों को मुआवजे के तौर पर 22.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए 126 करोड़ रुपये का पुनर्वास पैकेज भी शामिल था। विशेष भू-अधिग्रहण अधिकारी (एसएलएओ) द्वारा दिए गए मुआवजे की धनराशि से असंतुष्ट कुछ भूमि मालिकों भूमि अधिग्रहण (एलए) अधिनियम 1894 के यू/एस 18 के संदर्भ फाइल किए थे, जिस क्रम में विभिन्न न्यायालयों ने मुआवजा प्रति एकड़ बढ़ाकर 4.60 लाख रुपये कर दिया था, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने भी मुहर लगा दी थी।न्यायालय के आदेशों के क्रम में एमओडी अभी तक 1008 मामलों में बढ़ा हुआ 380.42 करोड़ रुपये तक का मुआवजे का भुगतान कर चुका है। इस धनराशि को कारवार/अंकोला निष्पादन न्यायालयों के माध्यम से भूमि मालिकों के बीच वितरण के लिए एसएलएओ कारवार के पास जमा करा दिया गया है। पूर्व भूमि मालिकों द्वारा जमा आवेदनों के संबंध में एमओडी ने 858 मामलों में 207.11 करोड़ रुपये की धनराशि के लिए स्वीकृति दे दी है। डीईओ बेंगलुरू ने 23.02.2018 तक एसएलएओ, कारवार के पास 154 करोड़ रुपये जमा करा दिए हैं। बाकी 53,11,58,544 रुपये की धनराशि को डीईओ बेंगलुरू द्वारा फरवरी, 2018 में एसएलएओ, कारवार के पास जमा करा दिया गया है। इस प्रकार भूमि मालिकों को कुल 587 करोड़ रुपये (अनुच्छेद 18(1) और अनुच्छेद 28-ए सहित) भूमि अधिग्रहण मुआवजा दिया जाना है। केंद्र सरकार इसमें से 534 करोड़ रुपये एसएलएओ और न्यायालयों में पहले ही जमा करा दिया गया है। शेष 53 करोड़ रुपये फरवरी, 2018 के अंत तक जमा कराए जाने हैं।

Copyright @ 2017.