16/04/2018  महार्षि वाल्मीकि व संत रविदास सनातनी थे : जगतगुरु पंचानंद
पंचकूला- श्री हिंदू तख्त के धर्माधीश जगतगुरु पंचानंद गिरी महाराज ने कहा कि समाज में जातपात का जहर घोलने वाले समाज व देश विरोधी हैं । उन्होंने आज अंबेडकर के 128वें जन्म दिवस पर  कहा कि महार्षि वाल्मीकि व संत रविदास सनातनी हैं। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि आज भी समाज में इनकी मूर्तियों को लेकर विवाद किया जाता है। उन्होंने कहा कि कभी सनातनी समाज ने कभी भी साई की मूर्ति का विरोध नहीं किया, लेकिन भगवान वाल्मीकि जिन्होंने रामायण होने से पहले रामायण लिख दी यह ही नहीं माता सीता ने लवकुश को जन्म दिया उनका पालन पोषण किया, उस महार्षि वाल्मीकि की मूर्ति का विरोध क्यों किया जा रहा है । जगतगुरु पंचानंद गिरी ने कहा की जिस संत रविदास ने पूरी जिंदगी मां गंगा की पूजा की और गंगा के दर्शन किए वह दोनों संत महार्षि वाल्मीकि व संत रविदास दोनों ही पूजनीय हैं और दोनों की मूर्ति का कहीं भी लगने पर विरोध नहीं करना चाहिए ।

श्री हिंदू तख्त के धर्माधीश व देश में आतंकवाद के खिलाफ बेखौफ होकर लड़ने वाले जगतगुरु पंचानंद गिरी महाराज ने कहा कि हम हिंदू बड़े गर्व से कहते हैं कि कसम राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन यह भूल जाते हैं कि भगवान राम ने शबरी के झूठे बेर खाए थे । उन्होंने कहा कि भगवान ने अढ़ाई जात बनाई,नर नारी व किन्नर बनाये बाकी समाज में जातपात का भेदभाव हमने  पैदा किया । पंचानंद गिरी ने कहा कि कुछ समय पहले मनु व्यक्ति हुआ, जिसने काम के मुताबिक जात बांटी सफाई कर रहा शुद्र, लड़ाई कर रहा क्षत्रिय,ज्ञान बांट रहा ब्राह्मण लेकिन कुछ राजनेताओं ने राजनीति रोटी सेकने के लिए जातपात छुआ-छुत का खेल खड़ा कर दिया जिससे पूरा देश का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि संत समाज के 13 अखाड़ों ने प्रस्ताव पारित किया कि संत समाज किसी जातपात को जगह नहीं देगा । उन्होंने श्री हिंदू तख्त के देश के तमाम प्रचारकों से आह्वान किया कि वह देश के कौने कौने में जाकर जातपात की छुआ छूत के भेदभाव को मिटाए और समाज को बताएं कि संत रविदास व महार्षि वाल्मीकि सनातनी हैं । 
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