27/08/2018  बवाना की 16,200 फैक्ट्रियों का भविष्य अधर में

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2018, उत्तर-पश्चिम दिल्ली सांसद डॉ. उदित राज ने आज प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि “बवाना में 1996 में 16,200 फैक्ट्रियों के लिए प्लाट आवंटित किये गये थे | सरकार की तरफ से कोई सब्सिडी नही दी गयी थी और उसके विकसित करने की भी जिम्मेदारी प्लाट आवंटनधारियों पर ही छोड़ा था, जो कि उन्होंने किया | साधारणतयः अन्य औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए न केवल सब्सिडी दी जाती है बल्कि पूरा ढांचागत सरकार के द्वारा विकास कराया जाता है | इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को बवाना औद्योगिक क्षेत्र को विकास करने के लिए अधिक सहयोग देना चाहिए लेकिन तमाम कार्य विपरीत दिशा में ऐसे हो रहे हैं जिससे इनके उजड़ने का षड्यंत्र चल रहा है | यह औद्योगिक क्षेत्र अभी भी मूलभूत सुविधाएं जैसे उचित सड़क, वाटर सप्लाई, सुरक्षा एवं सफाई आदि से वंचित हैं | हर व्यापार सदा के लिए लाभकारी नही होता इसलिए उद्योग को जिन्दा रखने के लिए कुछ व्यवसाइयों ने व्यापार में बदलाव किया | कुछ मज़बूरी की वजह से बेंचा और किराये पर दिया | भारी भ्रष्टाचार की वजह से लाइसेंस देना मुश्किल हो गया है | अभी भी कुछ प्लाट पर व्यवसाय पूंजी अभाव में शुरू नही किया जा पाया है जो कि अभी नही के बराबर है |      

आज बवाना चैम्बर ऑफ़ इंडस्ट्रीज के चेयरमैन प्रकाश जैन, उपाध्यक्ष राज जैन, उपाध्यक्ष राजेंदर वर्मा, बवाना फ़ूड प्रोसेसर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष बंसल एवं महामंत्री दीपक गोयल ने आज डॉ. उदित राज से मुलाकात के दौरान अपनी मांगों को उनके समक्ष रखी | उनकी शुरू से ही मांग रही है कि प्लाटों को फ्री होल्ड किया जाये जो कि अब तक नही हो सका है | इसमें गलती सरकार की भी है न केवल उद्योगपतियों की | फ्री होल्ड करने की जो कीमत रखी है उसे वाजिफ रखा जाये, इसके अतिरक्त मूलभूत सुविधाएं अस्पताल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, साफ़-सफाई, आदि प्रदान की जाये | डॉ. उदित राज ने कहा कि दिल्ली सरकार की उदासीनता या व्यापार विरोधी नीति की वजह से सभी व्यापारियों में हडकंप है | दिल्ली सरकार के विभाग डीएसआईआईडीसी के सर्वे के अनुसार 3,180 प्लाट बेचे जा चुके हैं, 4,647 किराये पर और लगभग 3000 फैक्ट्रियों को बंद किया गया तथा मज़बूरीवश सैकड़ों फैक्ट्रियों ने आपना धंधा बदला | अब इन सभी पर नोटिस भेजी गयी है जिससे भारी मानसिक असंतुष्टि के शिकार हो गये हैं, जिस वजह से व्यापार ठीक से नही कर पा रहे हैं | गलती डीएसआईआईडीसी की है और सजा व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है | डॉ. उदित राज ने मांग किया है कि इन नोटिसों को तुरंत वापस किया जाये और बवाना चैम्बर ऑफ़ इंडस्ट्रीज की उपरोक्त मांगों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाये | यह भी उल्लेख करना उचित है कि 25 फरवरी 2011 ने दिल्ली हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि फ़ौरन लीज होल्ड से फ्री होल्ड किया जाये जो कि अभी तक नही किया गया है | सन 2005 उस समय के उद्योग मंत्री श्री मंगत राम सिंघल ने कहा था कि तीन वर्ष के बाद इन प्लाटों को फ्री होल्ड कर दिया जाये | चूँकि ये दिल्ली सरकार के अधीन है इसके बावजूद केन्द्र सरकार इसे फ्री होल्ड के पक्ष में है लेकिन राज्य सरकार इसकी शुरुआत तो करे |

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