अन्तरराष्ट्रीय (27/12/2018) 
भक्षक नहीं संरक्षक बना कर भेजा था माँ ने मानव को -अदिति भारती

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा सी.बी.डी. ग्राउंड, लीला होटल के सामने, शाहदरा, दिल्ली में आयोजित संस्थान के विशिष्ट गौ संरक्षण प्रकल्प कामधेनु को समर्पित श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन की कथा में कथाव्यास साध्वी अदिति भारती जी ने दुर्गम वध की कथा का वर्णन किया| इस कथा का विश्लेषण करते हुए आधुनिक और वैज्ञानिक तर्कों से सिद्ध किया की वास्तव मे उस काल मे अनावृष्टि की समस्या आज की पर्यावरण समस्या से भिन्न नहीं है| पर्यावरण संरक्षण और गौ संरक्षण के मुद्दों को उठाते हुए साध्वी जी ने  श्रद्धालों को याद कराया की माँ ने हमे भक्षक नहीं संरक्षक बना कर इस धरा पर भेजा था| उन्होंने ने बताया की माँ ने शताक्षी और शाकम्भरी रूप धारण कर समाज के समक्ष जल संरक्षण और वृक्षारोपण के सिद्धांत को ही रखा था| आज के पर्यावरण संकट को यदि हम निर्मूल करना चाहते हैं तो हमे इन्ही सिद्धांतों को अपनाना होगा और साथ ही विशेष रूप से गौ संरक्षण की ओर बढ़ना होगा| रखते हैं| इस सरस प्रसंग को सुन  श्रद्धालों ने माँ प्रकृति और विशेषकर गौमाता के संरक्षण का संकल्प उठाया|

श्रीमद देवी भागवत मह्पुरण की सप्तम स्कन्द की गाथा का वर्णन करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी अदिति भारती ने तारकासुर नामक दैत्य के आतंक से त्रस्त हुई धरा के प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को सचेत किया की तारकासुर का अस्तित्व केवल पौराणिक ही नहीं है आज भी हम समय के उस पड़ाव पर खड़े हैं जहाँ पाखंड रुपी तारकासुर ने आ हमे घेरा है| सत्य और असत्य की धूमिल हुयी रेखाएं और हर ओर विस्तार पता फेक कल्चर- मार्किट में फेक प्रोडक्ट्स, फेक कम्पनियां, फेक फ़ूड, फेक सुन्दरता और यहाँ तक की अध्यातम क्षेत्र में बढ़ते फेक गुरु मानव को भ्रमित कर रहे हैं| श्रधालुओं को सच्चे गुरु की कसौटी देते हुए भागवत में दर्ज हिमालय राज और स्वयं माँ भगवती के संवाद देवी गीता का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने बताया की माँ कहती है- दिव्यं ददामि ते चक्षु पश्यमैव रूपमैश्वरम् अर्थात जो दिव्य नेत्र प्रदान कर तत्क्षण मेरे दर्शन कराये वही पूर्ण गुरु है|

कथा के अंतिम क्षणों में श्रद्धालों ने माँ पार्वती और भगवन शिव के विवाह में बढ़ चढ़ कर भाग लिया और इस विवाह उत्सव के गहन तथ्य को उजागर करते हुए साध्वी जी ने बताया जब गुरु की कृपा से शिव और शक्ति का मिलन इस देह के भीतर होता है तब विवेक रुपी कार्तिकेय जी के माध्यम से ही तारकासुरों का समूल नाश होता है|

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