राष्ट्रीय (29/04/2019) 
बुलेट ट्रेन 5 साल में चली दो कदम सरकार बड़े-बड़े सपने दिखाने की अपेक्षा धरातल पर करें काम - मानव आवाज
बुलेट ट्रेन के बड़े-बड़े सपने दिखाकर सरकार ने देश की आम जनता को भ्रमित किया है, जबकि वास्तविकता में भारत सरकार 15 मार्च 2019 तक बुलेट ट्रेन के लिए एक तिहाई भूमि ही अधिग्रहण कर पाई है। योजना अनुसार बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 1434.28 हेक्टेयर भूमि दिसम्बर 2018 तक अधिग्रहण करनी थी।
 
      मानव आवाज संस्था द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कार्पोरेशन लिमिटेड ने बताया कि अहमदाबाद ओर मुम्बई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए लगभग 1434.28 हेक्टेयर भूमि में से 15 मार्च 2019 तक मात्र 465.77 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की गई है। सम्पूर्ण अधिग्रहण भूमि की कुल अनुमानित लागत 14217.28 करोड़ है।

        परियोजना की आरम्भिक योजना अनुसार सरकार को परियोजना के लिए दिसम्बर 2018 तक सम्पूर्ण जमीन अधिग्रहण करनी थी, परन्तु सरकार ने अब जमीन अधिग्रहण की समय सीमा जून 2019 घोषित कर दी है।

     मानव आवाज संस्था के संयोजक एडवोकेट अभय जैन एवं प्रवक्ता बनवारी लाल सैनी ने दुःख प्रकट किया कि पांच वर्ष बाद भी परियोजना के लिए कुल जमीन का लगभग 67 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण करना शेष हैं।

     ज्ञात रहे भारत और जापान ने सितम्बर 2013 में मुम्बई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन की फीसीबिलिटी रिपोर्ट का अध्ययन करना आरम्भ किया था। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जारी किए अपने घोषणा पत्र के पेज नम्बर 33 पर दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कलकत्ता को आपस में बुलेट ट्रेन से जोड़ने का वादा किया था। सरकार आने के तुरन्त बाद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुम्बई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन को जून 2014 को स्वीकृति दी थी।

     परन्तु 3 वर्ष 3 महीने बाद, सितम्बर 2017 में भारत के प्रधानमंत्री और जापान के प्रधानमंत्री ने परियोजना की आधारशिला रख कर घोषणा में बताया कि परियोजना पर लगभग कुल 1,10,000 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। परियोजना लागत का लगभग 81 प्रतिशत जीआईसीए (जापान इंटरनेशनल कोपरेशन एजेंसी) से साॅफ्ट लोन के रुप में आएगा ओर शेष भारत सरकार की इक्विटी, महाराष्ट्र सरकार और गुजरात सरकार द्वारा दी जाने वाली इक्विटी के रुप में आएगा। बुलेट ट्रेन की गति 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।

     आरम्भ में सरकार ने 15 अगस्त 2022 को बुलेट ट्रेन को हरी झंडी दिखाने की योजना बनाई थी, परन्तु अब सरकार ने परियोजना को 2023 के अन्त तक चालू किया जाना बताया है।

    अभय जैन ने बताया कि भारत सरकार और राज्य सरकारें आम जनता की परेशानी और मुसीबतों को हल करने के लिए धरातल पर गम्भीरता से कार्य करें तभी आम जनता को प्रजातंत्र का वास्तविक रुप में फायदा होगा। केवल बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की घोषणा करनें से आम जनता की समस्याओं का हल होने वाला नहीं हैं।

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