राष्ट्रीय (05/07/2019) 
बजट ही दिशाहीन जिसका कोई भी उद्देश्य स्पष्ट नहीं है।
भिवानी, 5 जुलाई। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्तमंत्री द्वारा पेश किया गया पहला बजट ही दिशाहीन व निराशाजनक है, जिसका कोई भी उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। ये बात आज केन्द्र सरकार द्वारा पेश बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अशोक बुवानीवाला ने कही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को दिल खोल कर वोट देने वाले मध्यमवर्ग के लिए इस बजट में झुनझना थमाने के सिवाय कुछ नहीं है। आम मध्यम वर्ग के करदाता के लिए बजट मायूसी भरा है क्योंकि होमलोन के केवल एक प्रावधान के अलावा कोई राहत नहीं है तथा टैक्स स्लैब्ज में भी उनके लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। बुवानीवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने बजट में प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देकर कुछ बड़े पुंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी कम्पनियों को बेचने का संकेत साफ कर दिया है। जिस कारण देश में न केवल छोटा व मझला व्यापार तबाह होगा बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, किसान व ग्रामीण समस्या और भी जटिल होगी। बुवानीवाला ने कहा कि तीन राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों के मतदाताओं को आकर्षित करने के मकसद से यह बजट कम और सरकार के कार्य का बखान ज्यादा था क्योंकि अंतरिम बजट पहले ही आ चूका था और अप्रत्यक्ष कर के सुझाव अब वित्त मंत्रालय से हट कर जीएसटी कौंसिल के परिक्षेत्र में आ गया है अत: वर्तमान बजट में सरकार के पास कुछ ज्यादा करने के लिए नहीं था। बुवानीवाला ने कहा कि कारोबार हेतु बैंक से 1 करोड़ के ज्यादा नगद निकलने पर 2 प्रतिशत श्रोत पर कर कटौती पूरी तरह गलत है क्योंकि कारोबार में नगद जमा करना एवं निकलना एक आम गतिविधि है। जिस निर्णय का पूरा बोझ लघु व मझले उद्योगों पर पडऩा स्वभाविक है। बुवानीवाला ने कहा कि डिजिटल पेमेंट लेने से कोई व्यापार अब आकार नहीं कर सकता जैसा धारा 269एसयू के अंतर्गत नवंबर 2019 से प्रस्तावित किया गया है। ऐसा न करने पर 5000  रूपए प्रतिदिन की पेनलिटी बिलकुल अनुचित है जिस पर सरकार को पुन: विचार करना चाहिए। भारत के प्रत्येक स्थान पर डिजिटल भुगतान सेवा का आधारिक संरचना उपलब्ध ही नहीं है तो व्यापारी डिजिटल भुगतान सेवा कैसे प्रदान करेगा? उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने निजी उद्योगों की अर्थव्यवस्था की मजबूती की बात तो कही परन्तु मंदी एवं ऑनलाइन के कारण खुदरा व्यापार की कमजोर हुए अर्थव्यवस्था पर कुछ भी संज्ञान नहीं लिया। बुवानीवाला ने कहा कि यदि सरकार अपना पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा करना चाहती है तो उसे खुदरा व्यापारी की अर्थव्यवस्था भी मजबूत करनी होगी। परन्तु अफसोस की बात है कि इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बुवानीवाला ने कहा कि बजट में प्रस्तावित किया गया है कि 5 करोड़ वार्षिक से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को त्रिमासिक जीएसटी रिटर्न फाइल करनी है। ऐसे में प्रश्र उठता है कि जीएसटी के अंतर्गत खरीद पर यदि किसी विके्रता व्यापारी ने सरकार को कर जामा नहीं किया तो के्रता व्यापारी को इनपुट के्रडिट कैसे मिलेगा? वर्तमान में जीएसटी में सबसे बड़ी परेशानी यही है जिसका सरकार ने कोई समाधान नहीं सुझाया। सोना एवं  बहुमूल्य धातु पर ड्यूटी 2.50 प्रतिशत  बढ़ा कर 12:50 प्रतिशत करने के निर्णय से धातुओं की महंगाई भी बढ़ेगी और छोटे एवं मध्यम वर्गीय व्यापारियों का व्यापार मंदी के दौर में जाएगा। छोटे व्यापारियों को आए दिन अधिकारियों द्वारा प्रताडित किया जा रहा है इस उत्पीडऩ को खत्म करने के लिए कोई नीति लागू नहीं की गई है। यह बजट व्यापार जगत को खुश करने में विफल है जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पडऩा दिखाई दे रहा हैं। बुवानीवाला ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में देश की विकास दर 5 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसके बावजूद वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था को अगले कुछ वर्षों तक 5 ट्रिलियन डॉलर की बनाने की बात हास्यापद है क्योंकि इसके लिए विकास दर का 8 प्रतिशत होना जरूरी है। देश में पूंजी का विकास भी इससे संभव नहीं है। बुवानीवाला ने कहा कि जब विश्व भर में पेट्रोल और डीजल के दाम गिर रहे हैं, तो उसका फायदा आम आदमी तक पहुंचाने के बजाय सरकार 1 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क और उपकार लगाने जा रही है जो सरकार का निंदनीय कदम है। 5 साल में मोदी सरकार ने डीजल पर 443 प्रतिशत व पेट्रोल पर 211 प्रतिशत एक्साइज बढ़ा व जनता की जेब काट कर 13,00,000 करोड़ की कमाई की और अब अपने दूसरे कार्यकाल में 1 रूपए प्रति लीटर टैक्स लगाकर आम जनता के जले पर नमक छिडक़ना चाहती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि बजट पुर्णत्या फर्जी है क्योंकि वित्त मंत्री ने फरवरी 2019 अंतरिम बजट के संशोधित अनुमानों का उपयोग पूरे वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमानों के रूप में किया है। चुनाव में अंतिम तिमाही में खर्च में कटौती का कोई हिसाब नहीं है। इसलिए अर्थव्यवस्था की एक आकर्षक तस्वीर बाजीगरी पर आधारित है। अशोक बुवानीवाला ने कहा कि बजट में कृषक वर्ग के लिए न तो उनकी आय दुगनी करने का रास्ता है, न न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा है, न अकाल-सूखे से लडऩे का कोई उपाय है और न ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संकट का सुधार करने का कोई रास्ता दिखाया गया है। पूरा देश गरीबी, उच्चतम बेरोजगारी, बदत्तर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा से पीडि़त व परेशान है। आज देश जिस बड़े पैमाने पर नौकरी के संकट का सामना कर रहा है, इस समस्या से निजात पाने के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। वित्त मंत्री का स्वयं एक महिला होते हुए महिलाओं की सुरक्षा पर बजट में कोई बात नहीं की गई इसी प्रकार सीनियर सिटीजन की उम्मीदों पर भी पानी फेरने के सिवाए कुछ नहीं किया गया है। अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाने, रोजगार सृजित करने या निवेश के प्रवाह को बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना या समाधान नहीं है। देश की जनता द्वारा प्रचंड बहुमत देने के बावजूद मोदी सरकार ने इस बजट से देश की उम्मीदों को निराश किया है। बुवानीवाला ने संसद में चाणक्य के श£ोकों को दोहराने से देश की विकास को गति नहीं मिलेगी क्योंकि विकास की गति बढ़ाने के लिए श£ोकों की नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जैसी नीतियां बनानी पड़ती है। 
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