(06/12/2020) 
मल्टीपल स्कलैरोसिस – युवाओं में एक चिंता का विषय।
दुनिया के भावी युवाओं की जिंदगी से खेलती सैन्ट्रल नवर्स सिस्टम की एक लाईलाज बीमारी अब भारत में भी अपने पैर पसार चुकी है। यह बात इंटरनैशनल फैडरेशन फॉर मल्टीपल स्कलैरोसिस की निदेशिका मोनिका ने कही। 

उन्होंने बताया कि मल्टीपल स्कलैरोसिस (एम एस) का निदान ज्यादातर 17 से 35 वर्ष की आयु में होता है। मोनिका शर्मा ने बताया कि पिछले दशक के अनुसंधानों  के आधार पर पर पता चला है कि अब बच्चों में भी मल्टीपल स्कलैरोसिस होने लगा है, जो एक चिंता का विषय है। पुरुष वर्ग की अपेक्षा महिलाएं ईस बीमारी से दो गुणा ज्यादा ग्रसित पाई जाती हैं।

कम उम्र में अत्याधिक असमर्थता पैदा करने वाली इस बीमारी से दुनिया में लगभग 5 करोड़ या इससे अधिक आदमी प्रभावित हो चुके है, और यह संख्या लगातार बिना रुके बढ़ती जा रही है। मल्टीपल स्कलैरोसिस चिकित्सकों के अनुसार भारत में लगभग 9 लाख या इससे अधिक आदमी मल्टीपल स्कलैरोसिस से प्रभावित हो चुके है। यह बीमारी अब एशिया समेत भारत में भी अपने पैर पसार कर लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि यह ऐक अपजनन सम्बंधित बीमारी है। मल्टीपल स्कलैरोसिस में अप्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष दोनों ही असमर्थता व लक्षण पाऐ जाते हैं, इनमें  अत्याधिक असमर्थता के साथ डिप्रेशन भी हावी रहता है। मल्टीपल स्कलैरोसिस का निदान हो जाने के बाद व्यकित जीवन भर ईस बीमारी से ग्रसित रहता है। इसके मुख्य लक्षण - अत्याधिक असमर्थता, डिप्रेशन, दिखाई सुनाई बोलने सम्बंधित दिक्कतें, पूरे या फिर किसी एक अंग में लकवा, सुन्नपनता, प्रजनन सम्बंधित या चलने फिरने में दिक्कतें आदि होती हैं। मल्टीपल सकलेरोसिस सामान्य जीवन को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है जिसमें जागरूकता  जिंदगी को सामान्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाऐगी।

उन्होंने बताया कि यह लक्षण अलग-अलग मरीजों में अलग-अलग पाऐ जाते हैं। किसी में कम या किसी में ज्यादा लक्षण दिखाई देते हैं, ये या तो आते-जाते रहते हैं या फिर स्थायी रूप से मरीज में रहते हैं, और ईनकी तीव्रता भी अलग-अलग होती है, जो ईस बीमारी को और ज्यादा उलझाने वाली बनाती है, ज्यादातर चिकित्सकों व अनुसंधानकर्ताओं के लिए जिसकी वज़ह से वह मल्टीपल स्कलैरोसिस के किसी निष्कर्ष या किसी स्थायी ईलाज तक नहीं पहुंच पाते हैं। मल्टीपल स्कलैरोसिस एक सार्वजनिक रोग है, बिना लिंग, वर्ग, आयु के भेदभाव के सभी ईसकी जद में हैं।

अगर आप में भी इनमें से कोई लक्षण दिखलाई दे तो उसे नज़रअंदाज ना करें और अपने पास के स्वास्थय केंद्र/ पी.जी.आई. में तुरंत जांच कराऐं या अधिक जानकारी के लिए हमारी संस्था जो मल्टीपल सकलेरोसिस के लिए कार्यरत है पर समपर्क करें। फेसबुक: https//:www.facebook.com/ifms.org   ई-मेल: office.ifms@yahoo.com

मोनिका शर्मा,
डायरेक्टर
इंटरनैशनल फैडरेशन फॉर मल्टीपल स्कलैरोसिस
रजिस्टर्ड कंपनी एंव चैरिटी
CIN: U85100HR2013NPL049558/ 2013-14
  
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