नई दिल्ली के आग़ा ख़ान सभागार में 7 नवंबर 2025 की शाम साहित्य की मधुर धुनों से भर उठी, जब सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की बौद्धिक और सांस्कृतिक संस्था मेधा साहित्यिक मंच ने “कविता की एक शाम” का भव्य आयोजन किया। यह संध्या शब्दों, विचारों और भावनाओं का ऐसा संगम बनी जिसने सभागार में मौजूद हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शायर और अधिवक्ता दिलदार देहलवी रहे, जबकि अध्यक्षता सुप्रसिद्ध अधिवक्ता और हिंदी सेवी दर्शनानंद गौड़ ने की। शुरुआत अधिवक्ता जितेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई, जिसने शाम में एक पवित्र और साहित्यिक गरिमा घोल दी। संस्था के सचिव अधिवक्ता संजय जैन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
काव्य संध्या का संचालन शिक्षाविद और प्रसिद्ध कवि डॉ. विवेक गौतम ने संभाला। देश की विविध भाषाओं और शैलियों के कवियों ने मंच पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। दिलदार देहलवी, दिनेश गोस्वामी, मोहम्मद मुजीब, डॉ. अभिषेक अत्रेय, मंजूश्री जोशी (मराठी), डॉ. अश्विनी भारद्वाज, स्नेहा कलिता (असमीया), शायरा सुनीता रैना कौल, अतुलेश कुमार, पवन कुमार, चंद्रशेखर आश्री, विरजा मोहापात्र (ओड़िया), जितेंद्र सिंह (ब्रजभाषा) और कमल पुंडीर जैसे रचनाकारों की कविताओं ने संस्कृति की विविधता और कविता की ताकत को एक ही मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित अधिवक्ता, वरिष्ठ पत्रकार और सुप्रीम कोर्ट से जुड़े व्यक्तित्व भी मौजूद रहे। एनडीटीवी के कानूनी संवाददाता आशीष कुमार भार्गव, आज तक के संजय शर्मा, हिन्दुस्तान टाइम्स के उत्कर्ष आनंद सहित वरिष्ठ अधिवक्ता, कानूनी विशेषज्ञ और युवा अधिवक्ताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमा प्रदान की।







