दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग (EOW) ने एक बड़े बैंक धोखाधड़ी के मामले का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी संपत्ति दस्तावेज़ों के ज़रिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से ₹4 करोड़ का कर्ज़ हासिल किया था। यह फर्जीवाड़ा द्वारका सेक्टर-12 की एक संपत्ति के कागजात जालसाजी से तैयार कर अंजाम दिया गया।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में जतिन प्रसाद, जो दिल्ली स्थित कंपनी M/s Zukito International Pvt. Ltd. का निदेशक है, राजेंद्र कुमार उर्फ राजा और संदीप सिंह शामिल हैं। आरोपी जतिन प्रसाद ने अपने साथियों की मदद से द्वारका स्थित एक निर्दोष नागरिक की संपत्ति को निशाना बनाया और उसके नाम पर नकली बिक्री व पहचान पत्र (PAN, Aadhaar) तैयार करवाए। इसके बाद संदीप सिंह ने उसी व्यक्ति के रूप में खुद को पेश किया और कंपनी में निदेशक बना दिया गया।
इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए आरोपियों ने एसबीआई की एम.जी. रोड, गुरुग्राम शाखा से ₹4 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट (CC Limit) हासिल कर ली। जांच में सामने आया कि संदीप सिंह को इस फर्जीवाड़े में भूमिका निभाने के बदले ₹60 लाख का कमीशन दिया गया था। वहीं आरोपी राजेंद्र कुमार पहले भी दिल्ली में चार लूट और चोरी के मामलों में शामिल रह चुका है।
EOW की टीम ने तकनीकी निगरानी और डिजिटल फुटप्रिंट्स का विश्लेषण कर आरोपियों का पीछा किया और हरियाणा के कैथल व हिसार से राजेंद्र और संदीप को गिरफ्तार कर लिया। टीम में इंस्पेक्टर निकेश कुमार, इंस्पेक्टर रामकेश, एसआई संजीत, एसआई यशवर्धन और एसआई राहुल शामिल थे, जिनका नेतृत्व एसीपी वीरेंद्र कादयान कर रहे थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सबसे पहले एक असली संपत्ति की जानकारी ओपन सोर्स से जुटाई, फिर उसी की फर्जी रजिस्ट्री, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज़ तैयार किए। इन दस्तावेज़ों की मदद से कंपनी के रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया और बैंक से करोड़ों रुपये का लोन लिया गया। बाद में यह रकम शेल कंपनियों और निजी खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
EOW ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी संपत्ति और पहचान पत्रों के दस्तावेज़ किसी अनजान व्यक्ति या एजेंट के साथ साझा न करें। समय-समय पर अपनी संपत्ति की ऑनलाइन स्थिति की जांच करते रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। साथ ही बैंकों से भी कहा गया है कि वे कर्ज़ देने से पहले KYC और फील्ड वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और सख्त करें।









