जागरूकता ही बचाव: बढ़ते साइबर अपराधों पर दिल्ली पुलिस अलर्ट – रमन सिंह

नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस के अधिकारी रमन सिंह द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान के तहत आज नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत किया गया। उन्होंने कहा कि भारत की तेज़ डिजिटल प्रगति ने शासन, बाज़ार और नागरिक सहभागिता को नया स्वरूप दिया है। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं ने जहाँ समावेशन और दक्षता बढ़ाई है, वहीं साइबर जोखिमों का दायरा भी व्यापक हुआ है, जिससे नागरिकों और संस्थाओं के सामने नए प्रकार के खतरे उत्पन्न हुए हैं।

रमन सिंह ने कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह डेटा फिड्यूशरी और प्रोसेसर्स पर स्पष्ट जिम्मेदारियाँ तय करता है, क्योंकि कमजोर डेटा प्रबंधन सीधे साइबर अपराध को बढ़ावा देता है। उन्होंने चेतावनी दी कि लीक हुआ व्यक्तिगत डेटा डार्क वेब पर पहुँचकर धोखाधड़ी, पहचान दुरुपयोग और सोशल इंजीनियरिंग जैसे अपराधों का माध्यम बन जाता है।

उन्होंने बताया कि अब नियामक संस्थाएँ डिजिटल विश्वास की अग्रिम पंक्ति में हैं। वित्तीय नियामकों, क्षेत्रीय प्राधिकरणों और डेटा संरक्षण बोर्ड को कमजोर साइबर स्वच्छता और असुरक्षित संरचनाओं को केवल अनुपालन की कमी नहीं, बल्कि प्रणालीगत जोखिम के रूप में देखना होगा।

साइबर स्वच्छता पर जोर देते हुए रमन सिंह ने कहा कि पासवर्ड का पुनः उपयोग, समय पर सॉफ़्टवेयर अपडेट (पैचिंग) न करना और जागरूकता की कमी अधिकांश साइबर घटनाओं का प्रमुख कारण हैं। यह तकनीक की नहीं, बल्कि अनुशासन और प्रशिक्षण की कमी का परिणाम है। ऐसे में सरकार, निजी संस्थानों और नागरिकों—तीनों स्तर पर साइबर स्वच्छता को मजबूत करना आवश्यक है।

भारत की संघीय संरचना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसिंग राज्यों के पास है, जबकि दूरसंचार और डेटा शासन केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस संतुलन में दूरसंचार विभाग (DoT) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। DoT दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सेवा प्रदाताओं पर सुरक्षा मानक लागू कराने, विभिन्न साइबर एजेंसियों के साथ समन्वय, 5G सुरक्षा व एन्क्रिप्शन को बढ़ावा देने तथा SIM/KYC मानकों के जरिए धोखाधड़ी रोकने में अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग केवल नियामक संस्था नहीं, बल्कि देश की डिजिटल संरचना का साइबर संरक्षक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत की डिजिटल रीढ़ सुरक्षित, लचीली और राष्ट्रीय साइबर लक्ष्यों के अनुरूप बनी रहे।

अंत में रमन सिंह ने कहा कि साइबर शासन को परतदार, अनुकूलनशील और दूरदर्शी होना चाहिए। डिजिटल समाज में विश्वास केवल कानून लागू करने से नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता, जवाबदेह नियमन, साझा जिम्मेदारी और अनुशासित साइबर स्वच्छता से कायम रहता है। जैसे-जैसे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, वैसे-वैसे साइबर संस्थानों की मजबूती नागरिकों के डिजिटल भरोसे को तय करेगी।

  • Leema

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