दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी सिम पोर्टिंग, मोबाइल फोन पर अवैध एक्सेस और बैंक खातों से धोखाधड़ी कर लाखों रुपये निकालने में शामिल था। मामले में 38,10,341 रुपये की ठगी सामने आई है।
पीड़ित की शिकायत पर 12 जनवरी 2026 को क्राइम ब्रांच थाने में ई-एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच में पता चला कि 30 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच साइबर ठगों ने व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के जरिए झांसा देकर पीड़ित के मोबाइल फोन का कंट्रोल हासिल कर लिया। इसके बाद उन्होंने एसएमएस और कॉल फॉरवर्डिंग को डायवर्ट कर सिम को झारखंड के जामताड़ा स्थित अपने नेटवर्क में पोर्ट करा लिया। फिर बैंकिंग ऐप्स का दुरुपयोग कर IMPS, NEFT और UPI के माध्यम से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।
बैंक स्टेटमेंट की जांच में एक लाभार्थी खाता पंजाब नेशनल बैंक का मिला, जिसमें 99,999 रुपये ट्रांसफर हुए थे। यह खाता ग्रेटर नोएडा निवासी विपुल कश्यप के नाम पर था। पुलिस ने 4 मई 2026 को उसे गिरफ्तार किया। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर मुख्य साजिशकर्ता 21 वर्षीय आयुष शर्मा को भी नोएडा से दबोच लिया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आयुष शर्मा इंस्टाग्राम विज्ञापनों के जरिए लोगों को कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और सिम कार्ड किराए पर देने के लिए फंसाता था। एक अन्य आरोपी विशाल कुमार, जो राजस्थान के भिवाड़ी का रहने वाला है और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था, को भी ट्रेस कर पाबंद किया गया है।
क्राइम ब्रांच की टीम ने इंस्पेक्टर मंजीत कुमार के नेतृत्व में इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि मामले की आगे जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।






