दिल्ली को वर्ष 2027 तक नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में दिल्ली पुलिस ने एक और ठोस कदम उठाया है। नशा मुक्त भारत अभियान से प्रेरित होकर दिल्ली पुलिस ने शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार के सहयोग से पुलिस मुख्यालय स्थित आदर्श ऑडिटोरियम में ड्रग एब्यूज पर वर्कशॉप-कम-अवेयरनेस प्रोग्राम का आयोजन किया।
इस विशेष कार्यक्रम में राजधानी के विभिन्न स्कूलों से आए 300 से अधिक फिजिकल एजुकेशन टीचर्स और NSS प्रोग्राम ऑफिसर्स ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 1000 से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षक व छात्र ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और NSS अधिकारियों को नशे के खिलाफ इस मुहिम का अहम हिस्सा बनाना था, ताकि वे स्कूल स्तर पर छात्रों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्पेशल सीपी (क्राइम) श्री देवेश चंद्र श्रीवास्तव, IPS ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सप्लाई चेन तोड़ने के साथ-साथ जागरूकता के जरिए मांग को भी कम करना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों को नशे के अलग-अलग रूपों और उनके संकेतों की जानकारी दी, जैसे—व्यवहार में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और गोपनीयता बढ़ना।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पीयर प्रेशर से दूर रहें, नशे के खिलाफ आवाज उठाएं और जरूरत पड़ने पर समय रहते मदद लें। साथ ही MANAS हेल्पलाइन 1933 की जानकारी दी, जिसके जरिए नशा तस्करी और अवैध गतिविधियों की गुप्त सूचना दी जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान अस्मिता थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने नशे के सामाजिक और व्यक्तिगत दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
दिल्ली पुलिस का यह प्रयास स्पष्ट संदेश देता है कि नशे के खिलाफ जंग सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि समाज और शिक्षा के सहयोग से जीती जा सकती है।





