दिल्ली के कारीगरों के लिए नई उड़ान: ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ से मिलेगा ग्लोबल बाजार और सम्मानजनक आजीविका

दिल्ली सरकार ने खादी, हैंडलूम, कुटीर उद्योग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना’ को मंजूरी दे दी है। सरकार का दावा है कि यह पहल हजारों परिवारों के लिए आत्मनिर्भर भविष्य की ठोस शुरुआत साबित होगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के कारीगर हमारी सांस्कृतिक विरासत की असली पहचान हैं, लेकिन बदलते समय के साथ उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और डिजिटल बाजार से सीधा जुड़ाव भी जरूरी है। यह योजना उन्हें न सिर्फ नया कौशल देगी, बल्कि उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का रास्ता भी खोलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कौशल को सीधे सम्मानजनक आय से जोड़ने के विजन पर काम कर रही है।

योजना को दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से लागू किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 3,728 कारीगरों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 8.95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। आगामी वर्ष में इसे बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी है। प्रशिक्षण 12 दिनों का होगा, जिसमें उद्यमिता विकास कार्यक्रम भी शामिल रहेगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक लाभार्थी को 4,800 रुपये का स्टाइपेंड और प्रतिदिन भोजन सहायता दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर जरूरत के अनुसार टूलकिट भी प्रदान की जाएगी।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हर कारीगर की प्रोफाइल और उत्पादों का ई-कैटलॉग तैयार कर उसे ओएनडीसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा, जिससे उन्हें डिजिटल मार्केट के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। साथ ही ‘रिकॉग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग’ के तहत पहले से काम कर रहे पारंपरिक कारीगरों के अनुभव को प्रमाणित कर उन्हें औपचारिक पहचान दी जाएगी। लाभार्थियों को प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, एमएसएमई पंजीकरण और ऋण संबंधी जानकारी में भी सहायता मिलेगी।

योजना की शुरुआत ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत दर्जियों से की जाएगी और आगे चलकर इसे कुम्हार, बढ़ई, मोची, बांस उत्पाद निर्माता, कालीन बुनकर, इत्र निर्माता, धोबी, नाई और अन्य पारंपरिक व्यवसायों तक विस्तारित किया जाएगा। पात्रता के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है और एक परिवार से केवल एक सदस्य को लाभ मिलेगा। पूरी प्रक्रिया आधार आधारित सत्यापन के साथ पारदर्शी तरीके से लागू की जाएगी।

उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह पहल केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि हजारों परिवारों को सम्मान और आत्मनिर्भरता देने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे पारंपरिक कला सुरक्षित रहेगी और कारीगर आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढाल सकेंगे।

दिल्ली सरकार का मानना है कि यह योजना कौशल, तकनीक और बाजार को एक साथ जोड़ते हुए राजधानी के कारीगरों को नई पहचान, नई दिशा और वैश्विक अवसर प्रदान करेगी।

  • Leema

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