नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि निःस्वार्थ सेवा मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण की भावना के साथ देश हर नागरिक के जीवन को बेहतर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा—
“हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्।
तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये।।“
उन्होंने बताया कि इस सुभाषित का संदेश है कि मनुष्य को वही कार्य करना चाहिए जो सभी प्राणियों के हित में हो और आत्मा को शांति प्रदान करे। यही ईश्वर के प्रति सच्चा समर्पण है तथा यही मार्ग सभी पुरुषार्थों और आध्यात्मिक उपलब्धियों का मूल आधार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “निःस्वार्थ कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी शक्ति है। हम सेवा और समर्पण के इसी भाव के साथ हर किसी के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।”
प्रधानमंत्री के इस संदेश में समाज के प्रति सेवा, लोककल्याण और निःस्वार्थ कर्म की भावना को सर्वोच्च मानते हुए सभी नागरिकों से जनहित और मानवता के कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया गया है।






