सर्दियों की दस्तक के साथ दिल्ली की हवा पर निगरानी तेज, DPCC ने पेश की ताज़ा तस्वीर

दिल्ली की हवा इन दिनों जैसे हर सुबह अपना नया मूड लेकर उठ रही है। सर्दियों की पहली ठिठुरन के बीच दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने आज एक अहम प्रेस ब्रीफिंग की, जिसकी अध्यक्षता चेयरमैन संदीप कुमार और मेंबर सेक्रेटरी संदीप मिश्रा ने की। बैठक का मकसद था राजधानी की मौजूदा हवा की गुणवत्ता, उसके उतार-चढ़ाव और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की साफ-सुथरी झलक जनता के सामने रखना।

बैठक में पेश किए गए नवंबर के AQI आंकड़ों ने इस बार उम्मीद की एक हल्की रोशनी दिखाई। पिछले साल की तुलना में इस बार नवंबर के सात में से छह दिनों पर हवा बेहतर दर्ज की गई। उदाहरण के तौर पर 1 नवंबर को पिछली बार जहां AQI 339 था, वहीं इस साल यह 303 रहा। 3, 4, 5, 6 और 7 नवंबर के आंकड़े भी इसी तरह अपने पुराने रिकॉर्ड से कम धुंधले दिखे। अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल जहां GRAP-III की कड़ी सीमाएं 13 नवंबर से लागू करनी पड़ी थीं, वहीं इस बार तैयारी पहले ही शुरू कर दी गई है।

सरकारी विभागों को साफ हिदायतें दी गई हैं कि कचरा और निर्माण मलबे को समय पर उठाना और सही तरीके से निपटाना होगा। मशीनों से सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा ताकि उड़ती धूल कम हो। परिवहन विभाग को निर्देश दिया गया है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई हो।

बैठक में जनता से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई। खासकर ठंड में लकड़ी, कोयला या बायोमास जलाने से बचने को कहा गया। बड़े हाउसिंग सोसायटियों से आग्रह किया गया कि सुरक्षा कर्मियों के लिए कोयला जलाने की जगह इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल किया जाए। निर्माणाधीन इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाना और उसका नियमित उपयोग अनिवार्य बताया गया है। ट्रैफिक कम करने के लिए CAQM द्वारा तय किए गए ‘स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग्स’ को भी जारी रखा गया है।

नागरिकों को सलाह दी गई कि वाहन ठीक हालत में रखें, केवल प्रमाणित ईंधन का उपयोग करें और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन या इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर कदम बढ़ाएं।

प्रदूषण संबंधी शिकायतों के लिए ग्रीन दिल्ली ऐप और 311 ऐप का उपयोग करने की अपील की गई, जहां शिकायतें सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचाई जाती हैं।

GRAP की स्थिति पर भी अपडेट साझा किया गया। अधिकारियों ने कहा कि अभी हवा की गतिशीलता पर करीबी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

DPCC ने बताया कि वह 24 स्टेशनों से लगातार डेटा मॉनिटर कर रहा है, जिसे बाद में CPCB द्वारा आधिकारिक AQI के रूप में जारी किया जाता है। कुछ छोटी तकनीकी गड़बड़ियां छोड़ दें तो लगभग सभी स्टेशन लगातार डेटा दे रहे हैं।

बैठक में पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा गया कि किसी भी तरह के डेटा में छेड़छाड़ के आरोप बेबुनियाद हैं। समिति ने यह भी कहा कि दिल्ली की हवा साफ करने की इस लड़ाई में आलोचना से नहीं, सहयोग से ताकत मिलेगी।

DPCC ने जनता, सरकारी एजेंसियों और निजी संस्थानों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, प्रदूषण फैलाने वाली आदतों को छोड़ें और इस सर्द मौसम में दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने की सामूहिक कोशिश में अपना हिस्सा दें।

  • Leema

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