दिल्ली सचिवालय में मंगलवार को क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के पदाधिकारियों और सदस्यों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता दिल्ली सरकार के समाज कल्याण एवं सहकारिता मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने की। बैठक में सहकारी संस्थाओं से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों, ऋण वसूली, डिफॉल्टर सदस्यों, दोहरी सदस्यता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सहकारिता आंदोलन को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास और सामूहिक सहभागिता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सहकारिता की मूल भावना “मैं” नहीं बल्कि “हम” होनी चाहिए। पारदर्शिता, आपसी समन्वय और सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से ही सहकारी संस्थाएं जनोन्मुखी और विश्वसनीय बन सकती हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिफॉल्टर सदस्यों, अनियमित ब्याज दरों और दोहरी सदस्यता जैसी गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी सहकारी संस्थाओं के लिए एक समान और स्पष्ट नियम लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के कामकाज में ईमानदारी और “जेंटलमैन कमिटमेंट” की भावना दिखनी चाहिए, तभी जनता का भरोसा मजबूत होगा।
बैठक में मौजूद सदस्यों ने सुझाव दिया कि सहकारी संस्थाओं को सामाजिक कल्याण की गतिविधियों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और सरकार तथा सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाना चाहिए। इन सुझावों से सहमति जताते हुए मंत्री ने कहा कि सहकारिता विभाग को और अधिक सहभागी, उत्तरदायी और जवाबदेह बनाया जाएगा।
मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने आश्वासन दिया कि दोहरी सदस्यता की पहचान, डिफॉल्टर सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, दिल्ली राज्य सहकारी समितियां अधिनियम की धारा 52 और 71 के तहत आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित ऋण वसूली मामलों के शीघ्र निपटारे, पात्र संस्थाओं को समयबद्ध तरीके से दिल्ली स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक की सदस्यता देने और विभाग की रिकवरी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर त्वरित कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सहकारी संस्थाओं की सलाहकार बोर्ड और विभाग के बीच हर 15 दिन में नियमित बैठकें होंगी, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके और निरंतर समन्वय बना रहे। साथ ही, दिल्ली में नई सहकारी पहल, सहकारी स्टोर और रोजगारोन्मुख मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सहकारी संस्थाओं की अहम भूमिका होगी। इससे न केवल संस्थाएं मजबूत होंगी, बल्कि आम जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
मंत्री ने कहा कि दिल्ली की कई सहकारी संस्थाएं 50 वर्षों से अधिक पुरानी हैं और उनका कार्य सहकारिता आंदोलन की विश्वसनीयता का उदाहरण है। उन्होंने नवगठित संस्थाओं से भी पारदर्शिता, अनुशासन और ईमानदारी के साथ कार्य करने की अपील की।
अंत में मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी सहकारी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा और भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी सहकारी संस्थाओं से आह्वान किया कि वे सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ें और समाज के आर्थिक व सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।






