नई दिल्ली, 19 जनवरी 2026।
दिल्ली पुलिस ने आज SPUWAC परिसर, नानकपुरा में “स्वाभिमान” नामक जेंडर इन्क्लूसिव वर्कप्लेस पहल की शुरुआत कर कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया। यह पहल विशेष रूप से पुलिस स्टेशनों और महिला-केंद्रित इकाइयों को जेंडर सेंसिटिव बनाने पर केंद्रित है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री अजय चौधरी, आईपीएस, विशेष आयुक्त पुलिस (विजिलेंस एवं SPUWAC), दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि और SPUWAC का स्टाफ मौजूद रहा। “स्वाभिमान” की थीम “दिल्ली के सभी पुलिस थानों को जेंडर सेंसिटिव बनाना” रखी गई है, जिसका उद्देश्य पुलिस कार्यस्थलों में समावेशिता, गरिमा और मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं को सशक्त करना है।
यह पहल दिल्ली पुलिस और पब्लिक पुलिस के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है, जिसका नेतृत्व भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री के. जी. बालकृष्णन कर रहे हैं। इस अभियान में व्योमिनी सोशल फाउंडेशन की संस्थापक सुश्री प्राची कौशिक की अहम भूमिका है। यह साझेदारी संस्थागत समर्थन, कानूनी दृष्टिकोण और सामाजिक जागरूकता को एक मंच पर लाकर जेंडर सेंसिटिविटी को स्थायी और संरचित रूप देने का प्रयास है।
अपने संबोधन में श्री अजय चौधरी, आईपीएस ने कहा कि जेंडर-इन्क्लूसिव इंफ्रास्ट्रक्चर और संवेदनशीलता किसी भी संगठन की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को मजबूत करती है। “स्वाभिमान” जैसी पहल पुलिस तंत्र में सम्मान, विश्वास और सकारात्मक कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देती हैं।
कार्यक्रम के दौरान मासिक धर्म स्वच्छता को एक बुनियादी आवश्यकता और कार्यस्थल की गरिमा का अहम हिस्सा बताया गया। SPUWAC नानकपुरा की प्रभारी, सुश्री अंजिता चेप्याला, आईपीएस ने कहा कि पीरियड फ्रेंडली पुलिस स्टेशन बनाकर दिल्ली पुलिस महिला कर्मियों की वास्तविक जरूरतों को स्वीकार कर रही है। यह कदम उनके स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
वहीं व्योमिनी सोशल एंटरप्राइज की संस्थापक सुश्री प्राची कौशिक ने कहा कि “स्वाभिमान” का उद्देश्य केवल मशीनें लगाना नहीं, बल्कि कार्यस्थलों पर मासिक धर्म से जुड़ी बातचीत को सामान्य बनाना है। पुलिस स्टेशन जैसे व्यस्त और चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षित और गरिमापूर्ण सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है, और यह पहल उसी दिशा में एक स्थायी बदलाव लाने का प्रयास है।
“स्वाभिमान” पहल के साथ दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह ऐसे कार्यस्थलों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां हर व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर मिल सकें। यह पहल न केवल महिला पुलिस कर्मियों के लिए, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र को अधिक संवेदनशील, सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।







