डीपीआर निर्माताओं की लापरवाही पर नितिन गडकरी की कड़ी फटकार, टेंडर प्रक्रिया में धांधली पर भी जताई चिंता

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को देशभर में हाईवे, सड़कों और सुरंगों के निर्माण में उचित प्रक्रियाओं का पालन न करने के लिए डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) निर्माताओं की कड़ी आलोचना की। उन्होंने यह बातें नई दिल्ली में आयोजित “टनलिंग इंडिया: उभरते रुझान और अवसर” के दूसरे संस्करण में कही, जिसका आयोजन FICCI ने किया था।

गडकरी ने सड़क दुर्घटनाओं और सुरंग विफलताओं से संबंधित मुद्दों पर बात करते हुए कहा, “मुझे यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन यदि इस समस्या में कोई दोषी है, तो वह डीपीआर बनाने वाले हैं। मैं माफी चाहता हूं, लेकिन ‘दोषी’ शब्द का प्रयोग कर रहा हूं। डीपीआर बनाने वाली कंपनियां सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों द्वारा चलाई जाती हैं, जो अपने घरों से गूगल पर काम करते हैं, बिना किसी विस्तृत जांच के।”

सरकार द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा करते हुए गडकरी ने कहा, “हमारी सरकार में ऐसी प्रणाली है कि डीपीआर प्राप्त करने के बाद वे केवल टेंडर जारी करने का काम करते हैं। क्योंकि मंत्री तकनीकी शब्दावली को समझने वाले नहीं होते, इसलिए तकनीकी और वित्तीय योग्यताओं को अधिकारियों द्वारा ही चतुराई से शामिल किया जाता है।”

गडकरी ने टेंडर प्रक्रिया में कुछ कंपनियों द्वारा की जा रही धांधली पर चिंता जताई और कहा, “मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि बड़ी कंपनियां अपनी गणना के अनुसार इन वित्तीय और तकनीकी योग्यताओं को पूरा करती हैं,” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी कंपनियां इन धांधलियों में शामिल नहीं होतीं।

उन्होंने सरकारी अधिकारियों की निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रभाव को भी उजागर किया और कहा, “मुझे लगता है कि हम सरकार चलाते हैं… हमारे संयुक्त सचिव, अवर सचिव हमारे मार्गदर्शक और दार्शनिक हैं। और जो भी वे फाइल पर लिखते हैं, उस पर महानिदेशक (डीजी) हस्ताक्षर करते हैं, और मंत्री भी उसी प्रकार से हस्ताक्षर करते हैं। इसी प्रकार हमारा रामराज्य चलता है।”

गडकरी ने इस तरह की धांधलियों के कारण परियोजनाओं की लागत में अनावश्यक रूप से वृद्धि होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि व्यापक अध्ययन और प्रतिस्पर्धा के माध्यम से लागत को कम किया जा सकता है। ज़ोजिला टनल परियोजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जो परियोजना 12,000 करोड़ रुपये में स्वीकृत हुई थी, वह 5,200 या 5,300 करोड़ रुपये में पूरी हो जाएगी। यह प्रतिस्पर्धा के कारण संभव हो सका।”

इस प्रकार, गडकरी ने उचित योजना और कार्यान्वयन के महत्व पर जोर दिया, जो परियोजनाओं की लागत को कम करने में सहायक हो सकता है।

  • Leema

    Related Posts

    MCD के ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ में जीरो वेस्ट कॉलोनियों को किया प्रोत्साहित

    नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा आयोजित ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ में जीरो वेस्ट कॉलोनियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) के प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में सतत कचरा…

    हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर अर्पित की पुष्पांजलि

    चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने 15 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा लोक भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    MCD के ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ में जीरो वेस्ट कॉलोनियों को किया प्रोत्साहित

    MCD के ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ में जीरो वेस्ट कॉलोनियों को किया प्रोत्साहित

    IMPPA प्रतिनिधिमंडल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, फिल्म उद्योग की समस्याओं पर हुई चर्चा

    IMPPA प्रतिनिधिमंडल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात, फिल्म उद्योग की समस्याओं पर हुई चर्चा

    हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर अर्पित की पुष्पांजलि

    हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर अर्पित की पुष्पांजलि

    एनसीसी कैडेटों की संख्या 20 लाख करने का लक्ष्य, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पूर्वोत्तर राज्यों से बनाई विस्तार योजना

    एनसीसी कैडेटों की संख्या 20 लाख करने का लक्ष्य, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने पूर्वोत्तर राज्यों से बनाई विस्तार योजना

    विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए दिशा-निर्देश

    विरोध-प्रदर्शनों की कवरेज के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने जारी किए दिशा-निर्देश

    SIR पर सरकारी कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दल सार्वजनिक माफी मांगें: दिल्ली गवर्नमेंट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन