नई दिल्ली, 13 जुलाई। दिल्ली पुलिस की उत्तरी जिला स्पेशल स्टाफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात हिमांशु भाऊ गैंग की एक सुनियोजित हत्या की साजिश को विफल कर दिया। पुलिस ने गैंग से जुड़े दो शूटरों, जिनमें एक किशोर (सीसीएल) भी शामिल है, को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से दो अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी हरियाणा से दिल्ली आए थे और रोहिणी के एक कारोबारी की हत्या करने वाले थे। उक्त कारोबारी को मार्च 2026 में हिमांशु भाऊ गैंग की ओर से रंगदारी की धमकी मिली थी, जिसके संबंध में अमन विहार थाना में पहले से मामला दर्ज है तथा कारोबारी को पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई थी।
उत्तरी जिला पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गैंग के शूटर हरियाणा से नेहरू विहार क्षेत्र पहुंचने वाले हैं। सूचना के आधार पर एसीपी (ऑपरेशन) विशेष धत्तरवाल की निगरानी और इंस्पेक्टर रोहित सरस्वत के नेतृत्व में स्पेशल स्टाफ की टीम ने 6-7 जुलाई की रात नेहरू विहार में जाल बिछाया। निगरानी और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप उर्फ काली (26 वर्ष), निवासी जींद, हरियाणा तथा फतेहाबाद निवासी 16-17 वर्षीय किशोर (सीसीएल) के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से दो अवैध सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और छह जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इस संबंध में थाना तिमारपुर में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पूछताछ में सामने आया कि किशोर आरोपी का संपर्क विदेश में बैठे फरार गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ से उसके साथी मोनू के माध्यम से हुआ था। मोनू भी कई हत्या के मामलों में वांछित है और भारत छोड़ चुका है। हिमांशु भाऊ ने आरोपियों को दिल्ली में एक कारोबारी की हत्या करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गैंग के स्थानीय सहयोगियों ने हरियाणा में दोनों आरोपियों को ठहराने, हथियार उपलब्ध कराने और दिल्ली तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की।
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें रोहिणी निवासी एक कारोबारी की हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वारदात को अंजाम देने से पहले ही दिल्ली पुलिस की सतर्क टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल कर दिया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई संगठित अपराध, रंगदारी और टारगेट किलिंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता है। मामले में गैंग के अन्य सदस्यों और स्थानीय सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।






