नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में इस बार खादी इंडिया पवेलियन लोगों का खास ध्यान खींच रहा है। बुधवार को खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने हॉल नंबर-6 में बने इस पवेलियन का दौरा किया और देशभर से आए कारीगरों, PMEGP उद्यमियों और स्फूर्ति क्लस्टर प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत की।
मनोज कुमार ने कारीगरों के अनुभव, मेहनत और नवाचारों को ध्यान से सुना और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न— ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि खादी इंडिया पवेलियन इसी सोच के अनुरूप तैयार किया गया है, जहां 150 से अधिक स्टॉल भारत की विरासत, दस्तकारी और ग्रामीण उद्यमिता का सुंदर परिचय दे रहे हैं।
इस बार पवेलियन का सबसे बड़ा आकर्षण है ‘बात खादी की’ पॉडकास्ट स्टूडियो— IITF में पहली बार शुरू की गई यह अनोखी पहल कारीगरों को मंच देती है कि वे अपनी कला, संघर्ष और सफलता की कहानी खुद अपनी आवाज़ में दुनिया तक पहुंचाएं। अध्यक्ष मनोज कुमार ने इस पहल को “आधुनिक तकनीक और परंपरागत कला का संगम” बताया।
पवेलियन में खादी वस्त्रों से लेकर प्राकृतिक सौंदर्य-उत्पाद, ग्रामीण खाद्य सामग्री, बांस-बेंत के सामान और नक्काशीदार कलाकृतियां आगंतुकों को खूब पसंद आ रही हैं। जम्मू-कश्मीर के पश्मीना शॉल, राजस्थान-बिहार-उत्तर प्रदेश के स्वदेशी उत्पाद, दक्षिण भारत की कांचीपुरम साड़ियां, आंध्र प्रदेश की लकड़ी की नक्काशी और पूर्वोत्तर के ईको-फ्रेंडली बांस उत्पाद पवेलियन को बेहद खास बना रहे हैं।
कई युवा उद्यमी, जिनकी इकाइयां PMEGP के तहत शुरू हुई थीं और जो आज लाखों-करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं, भी यहां मौजूद रहे। मनोज कुमार ने कहा कि यह सफलता ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता का प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘खादी क्रांति’ ने इस क्षेत्र का कारोबार 1.70 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है और लगभग 2 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने आगंतुकों से अपील की कि वे खादी और स्वदेशी उत्पाद खरीदकर गांवों में रहने वाले लाखों कारीगरों की आय बढ़ाने में योगदान दें।
IITF-2025 में खादी इंडिया पवेलियन सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की हस्तकला, परंपरा, मेहनत और स्वावलंबन की जीवंत तस्वीर बनकर उभरा है।







