छात्रों की प्रतिबद्धता उनके मन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है : डॉ. विजय रानी राजपाल

मानसिक स्वास्थ्य का पहला उत्सव: हंसराज कॉलेज में ‘सेराफ़िया’ का आयोजन :हर थकान केवल नींद की कमी से नहीं होती। कई बार यह ज़्यादा सोचने, अपेक्षाओं के दबाव और लगातार पीछे छूट जाने की भावना से आती है। ऐसे में रुककर साँस लेना, खुद को स्वीकार करना और थोड़ा सहज हो जाना ज़रूरी होता है।

‘सेराफ़िया’, हंसराज कॉलेज का पहला मानसिक स्वास्थ्य उत्सव, इसी भावना के साथ आयोजित किया गया। कॉलेज की परामर्श इकाई (काउंसलिंग यूनिट) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि विद्यार्थी तनाव से दूर होकर मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात कर सकें, और स्वयं से जुड़ सकें।

इस अवसर पर अतिथि उप-प्राचार्य डॉ. विजय रानी राजपाल ने कहा कि यह देखकर वाकई खुशी होती है कि छात्र ‘सेराफिया’ जैसी पहल कर रहे हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बढ़ती जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को उजागर करती है – खासकर युवाओं के बीच। हमारे इन-हाउस मनोवैज्ञानिकों, राहेल एलिस और मेहर प्रुथी के नेतृत्व में, हंसराज कॉलेज के छात्र अपनी और अपने साथियों की भलाई के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना का उदाहरण देते हैं। उनका उत्साह और प्रतिबद्धता इस बात का प्रमाण है कि युवा दिमाग हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम संयोजिका रेचल ऐलिस मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं मनोवैज्ञानिक ने ब्यूरो चीफ विजय गौड़ को बताया कि प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) रमा, उप-प्राचार्य डॉ. विजय रानी राजपाल और आईक्यूएसी (आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ) की निदेशक डॉ. अल्का कक्कर के सहयोग से यह उत्सव सार्थक रूप से सम्पन्न हुआ। शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय स्टाफ का भी इस प्रयास में पूर्ण सहयोग रहा।

रेचल ऐलिस मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक रेचल ऐलिस और मेहर प्रुथी ने सरल, सजीव और भावनात्मक संवादों के ज़रिए छात्रों से जुड़ाव स्थापित किया। परामर्श इकाई के अध्यक्ष तुषार सैनी ने पूरे आयोजन का नेतृत्व किया और इसे छात्रों के अनुभवों से जोड़ने योग्य बनाया।

कॉलेज की विभिन्न छात्र-संस्थाओं के रचनात्मक स्टॉल्स ने उत्सव में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। वहीं कबीर अली और अनुभव साइलस की संगीतमय प्रस्तुति ने सभी को उस पल में रुककर उसे महसूस करने का अवसर दिया।

प्रॉफेट्टी, पॉज़यू, सीज़न्स थेरेपी, सोशल्ली सोल्ड, सेतु (हंसराज कॉलेज के छात्रों द्वारा संचालित सामाजिक समूह) और रेक्ही फाउंडेशन जैसे सहयोगियों की भागीदारी ने यह याद दिलाया कि मानसिक स्वास्थ्य की यात्रा में हम अकेले नहीं हैं।

इस आयोजन के पीछे एक समर्पित छात्र टीम थी, जिन्होंने पूरे मन और मेहनत से इसे साकार किया:
गीतांजलि, वैभव, निकुंज, हृतिक, जिज्ञासा, ऐना, नीलाक्षी, मान्या, नव्या, श्रेयष्ठ, दीपाली, भरत, दीक्षा, डॉली, हर्षिता, आशुतोष, श्रिया और साक्षी।

‘सेराफ़िया’ ने न केवल खूबसूरत यादें दीं, बल्कि साथ में उम्मीद, अपनापन और आत्म-संवेदना का एहसास भी कराया।
दिल्ली से ब्यूरो चीफविजय गौड़ की विशेष रिपोर्ट

  • Leema

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