नोएडा स्टेडियम में उत्तराखंड महाकौथिग 2024 का भव्य शुभारंभ

नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को समर्पित सबसे बड़े मेले “उत्तराखंड महाकौथिग” के 14वें संस्करण का आज नोएडा स्टेडियम में भव्य और रंगारंग आगाज हुआ। यह पांच दिवसीय महोत्सव 21 से 25 दिसंबर 2024 तक आयोजित होगा। शुभारंभ के मौके पर मुख्य अतिथि गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, विशिष्ट अतिथि एसीपी शैव्या गोयल, डीसीपी ट्रैफिक लखन सिंह यादव, महाकौथिग के मुख्य संयोजक राजेंद्र चौहान और अध्यक्ष आदित्य घिल्डियाल ने दीप प्रज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया।

मुख्य अतिथि लक्ष्मी सिंह ने उत्तराखंड समाज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अपनी लोकसंस्कृति को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने की यह कोशिश काबिले तारीफ है। उन्होंने पहाड़ों से हो रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी से अपने गांवों का रुख करने और वहां बुजुर्गों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए पुलिस टीम की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।


इस बार महाकौथिग में उत्तराखंड के चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम मंदिर की थीम पर एक भव्य और आकर्षक मंच तैयार किया गया है, जो मेले का मुख्य आकर्षण है।


नोएडा स्टेडियम में सुबह कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक संगीत के साथ हुई। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया। उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने मंच पर मनमोहक लोक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।


दोपहर बाद 3:30 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक सौरभ मैठाणी, दीक्षा ढौंडियाल और जितेंद्र तोमक्याल ने पहाड़ी लोकगीतों की छटा बिखेरी। इसके साथ ही, शाम 4 बजे अभिनेता राकेश गौड़ और उनकी टीम ने लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया।


इस महाकौथिग में उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों के करीब 150 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें पहाड़ी मिठाई, दालें, अनाज, कपड़े और अन्य सामग्री उपलब्ध है। व्यंजनों के शौकीनों के लिए विशेष रूप से भड्डू में बनी घर्या दाल, भात, झंगोरे की खीर, आलू के गुटके, भांग की चटनी, कोदे की रोटी जैसी लजीज पहाड़ी डिशेज उचित दामों पर परोसी जा रही हैं।

उत्तराखंड की संस्कृति का यह महाकुंभ हर दिन नए रंग और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसमें हर उम्र के लोग शामिल होकर अपनी परंपराओं से जुड़ रहे हैं।

  • Leema

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