दिल्ली ट्रेड फेयर में ‘बिहार दिवस’ की धूम, इनवेस्टमेंट पॉलिसी 2025 बनी चर्चा का विषय

नई दिल्ली, 23 नवंबर 2025:
भारत मंडपम, प्रगति मैदान में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में रविवार को ‘बिहार दिवस’ धूमधाम से मनाया गया। पार्टनर स्टेट के रूप में शामिल बिहार ने न केवल अपनी समृद्ध संस्कृति और विरासत का शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि निवेशकों के लिए आकर्षक पैकेज और नई संभावनाओं का संदेश भी दिया।

बिहार सरकार के स्थानिक आयुक्त एवं इनवेस्टमेंट कमिश्नर श्री कुंदन कुमार (IAS) ने प्रेस वार्ता में बताया कि राज्य की नई इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2025 देश की सबसे बेहतरीन और आकर्षक नीति है, जो निवेशकों को जीएसटी सहित कई वित्तीय छूटों का अनूठा लाभ प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि “अब समय है कि निवेशक बिहार आएं और विकास की इस तेज़ रफ़्तार में अपना योगदान दें। सरकार उद्योग और शहरी विकास को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इस वर्ष बिहार पवेलियन को IITF 2025 की थीम “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के अनुरूप सजाया गया है। पवेलियन का मुख्य द्वार सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में प्रस्तावित सीतामाता मंदिर की भव्य झलक पेश करता है, जबकि पास ही पावापुरी मंदिर का सुंदर नमूना बनाया गया है। भीतर की दीवारों पर विश्व शांति स्तूप, महाबोधि मंदिर और पटना मेट्रो जैसे प्रतीकात्मक चित्रण पवेलियन को और आकर्षक बनाते हैं। केंद्रीय हॉल में स्थापित ‘बिहार संग्रहालय’ आगंतुकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

बिहार पवेलियन में कुल 65 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, बिहार खादी बोर्ड, पर्यटन विभाग, बीआईएडा, आम्रपाली एम्पोरियम तथा बिहार के मशहूर चावल—स्वर्ण मंसूरी, कतरनी और सोनम—के स्टॉल शामिल हैं। खास बात यह है कि पवेलियन में महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। जीविका दीदी के स्टॉल और ‘दीदी की रसोई’ बिहार के पारंपरिक व्यंजनों के साथ महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रहे हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में बिहार से आए लोक कलाकारों ने गीत, संगीत और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से माहौल को पूरी तरह बिहारमय बना दिया। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।

उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान द्वारा तैयार बिहार मंडप इस वर्ष मेले में सबसे आकर्षक पवेलियनों में गिना जा रहा है और लगातार बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँच रहे हैं। बिहार की कला, संस्कृति और निवेश संभावनाओं का यह अनूठा संगम आगंतुकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो रहा है।

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