जो लौट कर घर न आए: वीर नायक श्याम सिंह यादव

भारत माता के लिए बलिदान देने वाले नायक की कहानी

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ककरारी खेड़ा गांव के लाल, नायक श्याम सिंह यादव, ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर शहादत का अनमोल उदाहरण पेश किया। भारतीय सेना के 25 ग्रेनेडियर रेजिमेंट के इस वीर सपूत ने 23 दिसंबर 2022 को सिक्किम के उत्तर क्षेत्र में एक दर्दनाक दुर्घटना में वीरगति को प्राप्त किया।

साल 2022 में चीन सीमा पर बढ़ी गतिविधियों के चलते सेना के जवानों को एहतियातन सीमा चौकियों पर तैनात किया जा रहा था। इसी दौरान, तीन वाहनों का सैन्य काफिला चत्तेन से थांगू की ओर जा रहा था। इसी बीच जेमा के पास एक तीखे मोड़ पर सेना का वाहन सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिर गया। इस दुर्घटना में तीन जेसीओ समेत 16 सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी, जिसमें नायक श्याम सिंह यादव भी शामिल थे।

17 अगस्त 1991 को किसान परिवार में जन्मे श्याम सिंह यादव के पिता सुंदरलाल यादव और माता शांति देवी ने अपने बेटे को देशसेवा के संस्कार दिए। सरस्वती विद्यालय और आनंदी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद, श्याम सिंह ने बैसवारा डिग्री कॉलेज से स्नातक किया। 7 जून 2011 को वे भारतीय सेना में शामिल हुए और जबलपुर से प्रशिक्षण प्राप्त कर 25 ग्रेनेडियर रेजिमेंट का हिस्सा बने।

दुर्घटना से 15 दिन पहले ही वे छुट्टी पूरी कर हंसी-खुशी अपनी यूनिट में लौटे थे। लेकिन शायद किस्मत ने कुछ और ही लिखा था।

श्याम सिंह यादव के परिवार में उनकी पत्नी विनीता यादव और बेटा विवेक यादव हैं। विनीता ने पति की शहादत के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए अपने साहस और धैर्य से सभी को प्रेरित किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके परिवार को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी। साथ ही गांव की एक सड़क का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा भी की थी, जो आज तक अधूरी है।

वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवारों को लेकर अक्सर सरकार की घोषणाएं अधूरी रह जाती हैं। नायक श्याम सिंह यादव के परिवार का कहना है कि यदि उनके गांव में एक स्मारक और प्राथमिक विद्यालय का नाम उनके नाम पर किया जाए, तो यह उनकी शहादत का सच्चा सम्मान होगा।

सरकार को ऐसी घोषणाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और इन्हें समय पर पूरा करना चाहिए। वीरगति प्राप्त सैनिकों के परिवारों को सम्मान देने का यही सही तरीका है।

श्याम सिंह यादव जैसे वीर सपूत देश के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनकी शहादत हमें यह सिखाती है कि देश सेवा के लिए समर्पण सबसे बड़ा धर्म है।

उनकी स्मृति में स्मारक और नामकरण न केवल उनकी वीरता को सम्मानित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए प्रेरित भी करेगा।

“जो लौट कर घर न आए, वो देश के सच्चे रक्षक होते हैं। नायक श्याम सिंह यादव का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा।”

  • Leema

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