नवाचार एवं अंतःविषय दृष्टिकोण अपनाए :प्रो. मेहराज उद्दीन मीर कुलपति

( के.आर. मंगलम विश्वविद्यालय, गुरुग्राम ने “ सतत व्यापार परिवर्तन और कृषि पद्धतियों के लिए नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियाँ (ITSBTAP-2026)” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया सम्मेलन में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अपने शोध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में उत्कृष्ट शोध पत्रों को “बेस्ट पेपर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया तथा मुख्य वक्ताओं एवं पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया।)
के.आर. मंगलम विश्वविद्यालय, गुरुग्राम ने “ सतत व्यापार परिवर्तन और कृषि पद्धतियों के लिए नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियाँ (ITSBTAP-2026)” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से आयोजन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स तथा स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज द्वारा, इंडियन सोसाइटी ऑफ सॉइल सैलिनिटी एंड वाटर क्वालिटी (करनाल) के सहयोग से किया गया।

इस सम्मेलन में देश-विदेश से शिक्षाविद, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। दो दिवसीय यह सम्मेलन व्यवसाय, प्रौद्योगिकी और कृषि उत्पादन प्रणालियों में उभरते रुझानों, नवाचारों तथा सतत विकास संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श का एक प्रभावी मंच बना।

सम्मेलन में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के मुख्य वक्ताओं ने समकालीन चुनौतियों के समाधान हेतु अंतःविषय दृष्टिकोण पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंतर्गत तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा, शोध पत्र प्रस्तुतियाँ तथा संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिससे ज्ञान के आदान-प्रदान एवं सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा मिला। प्रतिभागियों ने सतत कृषि, एग्री-बिजनेस प्रबंधन, डिजिटल परिवर्तन तथा जलवायु अनुकूल कृषि प्रणालियों जैसे विषयों पर अपने नवीनतम शोध प्रस्तुत किए।

सम्मेलन के संयोजक डॉ. मानसी यादव, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. मोनिका यादव एवं डॉ. दीपक कुमार सहित विभाग के सभी संकाय सदस्यों ने दिन-रात परिश्रम कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

सम्मेलन का शुभारंभ कुलपति प्रो. मेहराज उद्दीन मीर के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा, व्यवसायिक गतिविधियों एवं कृषि प्रणालियों में स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के महत्व पर बल दिया और प्रतिभागियों को नवाचार एवं अंतःविषय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. आर. के. यादव, पूर्व निदेशक (ICAR-CSSRI) एवं अध्यक्ष (ISSSWQ) ने कृषि क्षेत्र में उपस्थित चुनौतियों एवं उनके समाधान पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन का आयोजन डीन डॉ. हीमा गुप्ता एवं डॉ. जे. एस. यादव के नेतृत्व में हुआ, जिनके मार्गदर्शन में सभी सत्र सफलतापूर्वक संचालित हुए। प्रथम दिवस से ही विभिन्न विषयगत सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुतियाँ प्रारंभ हो गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सक्रिय सहभागिता की।

दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। प्रमुख वक्ताओं में सुश्री कविता गंभीर, डॉ. महेश्वर द्विवेदी, डॉ. जे. एस. यादव तथा अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. इसिल डेमिर्तास शामिल रहे, जिन्होंने सतत विकास एवं नवाचार की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. जे. एस. यादव, प्रबंध निदेशक, नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड्स (COSAMB), ने वैश्विक कृषि बाजार की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि एवं प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

इसके अतिरिक्त, डॉ. अनुमेहा माथुर के संयोजन में आयोजित पैनल चर्चा ने सम्मेलन को और अधिक समृद्ध बनाया।

सम्मेलन में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अपने शोध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट शोध पत्रों को “बेस्ट पेपर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया तथा मुख्य वक्ताओं एवं पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया।यह सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

सम्मेलन में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अपने शोध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट शोध पत्रों को “बेस्ट पेपर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया तथा मुख्य वक्ताओं एवं पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया।

सम्मेलन में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने अपने शोध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट शोध पत्रों को “बेस्ट पेपर अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया तथा मुख्य वक्ताओं एवं पैनलिस्टों का अभिनंदन किया गया। दिल्ली से विजय गौड़ ब्यूरो चीफ की विशेष रिपोर्ट

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