11 साल से फरार आरोपी छत्तीसगढ़-झारखंड के जंगलों से गिरफ्तार

दिल्ली की क्राइम ब्रांच की टीम ने एक बड़े ऑपरेशन में 50,000 रुपये के इनामी और 11 साल से फरार कॉन्ट्रैक्ट किलर राजू बनारसी उर्फ राजू सिंह उर्फ मृत्यंजय सिंह को छत्तीसगढ़-झारखंड के घने जंगलों से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर 2013 में दिल्ली के तिलक नगर में हुए सनसनीखेज हत्या मामले में शामिल होने का आरोप था, और तब से वह फरार था।


2013 में तिलक नगर इलाके में हुए एक कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के मामले में राजू बनारसी फरार था। पुलिस ने 2014 में उसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। हत्या की वजह संपत्ति विवाद थी, जहां मृतक जितेंद्र लांबा के भाई राजेश सिंह लांबा ने अपने भाई की हत्या के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इस कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए 10 लाख रुपये की राशि तय की गई थी। राजू बनारसी को हत्या के दौरान सहायक के तौर पर तैनात किया गया था, जो हमलावरों को भागने में मदद कर रहा था। हत्या के बाद सभी आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन बाद में सभी की गिरफ्तारी हुई, सिवाय राजू बनारसी के, जो तब से फरार था और उसे अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था।
पुराने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने राजू बनारसी को पकड़ने के लिए उसके पिछले संपर्कों और फोन नंबरों की बारीकी से जांच की। बिना किसी ठोस सुराग के बावजूद, टीम ने 10 साल पुराने संपर्कों की पड़ताल की और झारखंड में उसके एक दूर के रिश्तेदार के फोन नंबर को ट्रैक किया। यह नंबर कुछ ही मिनटों के लिए चालू होता था और इसकी लोकेशन छत्तीसगढ़ और झारखंड के जंगलों में मिली।

इस जानकारी के आधार पर टीम जंगल के इलाके में पहुंची और स्थानीय श्रमिकों के साथ काम कर वहां तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक रणनीतिक जाल बिछाया, जिससे आरोपी को ट्रक चलाते समय धर दबोचा गया।


पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने पैसे के लालच में हत्या की थी। उसके माता-पिता का निधन 1999 में हो गया था और वह अकेला ही अपने जीवन को संभाल रहा था। मूल रूप से बनारस का रहने वाला राजू बाद में पलामू, झारखंड में बस गया था और ट्रक चलाने का काम करने लगा। जब उसे कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का प्रस्ताव मिला, तो उसने तुरंत इसे स्वीकार कर लिया और अपने साथियों के साथ हत्या को अंजाम दिया। फरार होने के बाद, उसने अपना नाम बदलकर मृत्यंजय सिंह रख लिया और छिपने के लिए जंगलों का सहारा लिया।

इस ऑपरेशन के सफल नेतृत्व के लिए डीसीपी क्राइम ब्रांच संजय कुमार सैनी ने पूरी टीम की सराहना की।

  • Leema

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