22 जनवरी 2025 को भव्य ‘रामलला पुरस्कार’ का आयोजन

श्री राम सेवा प्रतिष्ठान, अयोध्या और चित्तारा इन मीडिया के संयुक्त तत्वाधान में रामलला पुरस्कार, 2025 का आयोजन किया जा रहा है lनई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस वार्ता में श्रीराम सेवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष शशिकांत शर्मा जी ने बताया कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद, 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण किया गया है, जो सभी भारतीयों के लिए एक लंबे समय से संजोया हुआ सपना साकार होने का प्रतीक है। श्रीराम सेवा प्रतिष्ठान और कर्नाटक के चित्तारा मीडिया नेटवर्क द्वारा श्री रामलता की स्थापना का प्रथम वार्षिकोत्सव श्री रामोत्सव के रूप में विश्वभर में भव्य रूप से मनाया जायेगा। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य भगवान राम के प्रति भक्ति और प्रेम के माध्यम से देश को एकजुट करना है। आयोजन समिति की मीडिया कोऑर्डिनेटर रीना शुक्ला ने बताया कि समारोह के दौरान नृत्य, गायन, ड्राइंग, रामायण ड्रेस प्रतियोगिता और रामायण प्रश्नोत्तरी सहित रामायण से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिसमें देश भर के प्रतिभागियों को ऑनलाइन शामिल होने के लिए व्हाट्सएप नंबर +919880548451 पर जय श्री राम लिख कर रजिस्ट्रेशन कराना होगा l प्रतियोगिता के विजेताओं को अयोध्या में भव्य समारोह के दौरान पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा, जिसमें उनकी यात्रा का पूरा खर्च शामिल होगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक प्रतिभागी को एक प्रमाण पत्र और रामलला लॉकेट प्रदान किया जाएगा जो अयोध्या से उनके घरों तक पहुंचाया जाएगा।आयोजकों ने बताया इस प्रतियोगिता के अलावा इसके समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति जिन्होंने समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है उन्हें रामलला पुरस्कार 2025 प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।विशेष अयोध्या दर्शन सेगमेंट में एक भाग्यशाली परिवार के अधिकतम 6 सदस्यों को अयोध्या दर्शन के लिए चुना जाएगा।प्रतियोगिता की जानकारीःप्रतियोगिताएं दो श्रेणियों, जूनियर और सीनियर, में आयोजित की जाएंगी l जूनियर वर्ग के प्रतिभागियों की आयु 13 वर्ष से कम होनी चाहिए, जबकि सीनियर वर्ग के प्रतिभागियों की आयु 13 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। यह आयु सीमा सभी प्रतियोगिताओं पर लागू होता है। अयोध्या दर्शन सेगमेंट के लिए कोई आयु सीमा नहीं है।यह कार्यक्रम भगवान राम की विरासत का सम्मान करने में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिसमें अयोध्या की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करने के लिए भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों की एक श्रृंखला की योजना बनाई गई है।

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