07/01/2023 अस्थियों के विसर्जन के लिए पाकिस्तानी हिन्दुओं को वीजा दिए जाने का स्वागत।

नई दिल्ली। श्री देवोत्थान सेवा समिति (पंजी.) ने भारत सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के कराची शहर के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की लाइब्रेरी में रखे 464 अस्थि कलशो को उनके परिजनों द्वारा श्री गंगाजी में विसर्जन के लिए 10 दिन का वीजा दिए जाने की घोषणा की है। समिति के अध्यक्ष श्री अनिल नरेन्द्र ने कहा,कि समिति ने वर्ष 2011 में 135 अस्थि कलशो का व वर्ष 2016 में अट्टारी बार्डर से लाकर करीब 160 अस्थि कलशो को लाकर कनखल के सतीघाट पर वैदिक रीति से उन सभी का विसर्जन करवाया था।श्री नरेन्द्र ने कहा,श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत गद्दीनशीन श्री रामनाथ जी महाराज के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो पाया था। समिति के महामंत्री व यात्रा संयोजक रहे विजय शर्मा ने बताया,कि वर्ष 2011 में लाए गए उस समय इन अस्थि कलशो को लाकर उन पर वर्तमान रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह

 
06/12/2022 धर्म को बचाने के लिए क्या ज्योतिषाचार्यों को आगे आना चाहिए ?

श्रष्टि का नियम है कि 84 लाख योनियों में सिर्फ मनुष्य योनि ही धन का उपयोग जीवन जीने के लिए करती है । बाकी योनियों को धन की आवश्यकता ही नहीं होती है । वो अपना जीवन प्रकृति से चलाते है । एक मनुष्य का जीवन ही अदबुद है । इसको धन की आवश्यकता होती है । और श्रष्टि की उत्पत्ति के साथ भगवान ने मनुष्य जीवन को धन दे दिया था  । मनुष्य की मनोवृति दो प्रकार की बनी होती  है । एक तो वो लोग जो धन के पीछे भागते हैं । और दूसरे धन के साथ-साथ ज्ञान की पीछे भी भागते हैं । 

जो ज्ञानी गुरु होता है उसको भी धन की आवश्यकता होती है क्योंकि बिना धन के वो ज्ञानी गुरु जिंदा नहीं रह सकता है । ज्ञान से उसका पेट नहीं भर्ता है । पेट भरने के लिए और जीवन को सुरक्षित रखने के धन चाहिए । ज्ञानी तो अपने ज्ञान के द्वारा अनर्थ नहीं कर सकता है । फिर जीएगा कैसे । इसके लिए उसको धनवान की शरण में जाना पड़ता है ।&

 
02/12/2022 चीन की अनावश्यक चिंता- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

भारत,चीन और अमेरिका के बीच आजकल जो कहा-सुनी चल रही है, वह बहुत मजेदार है। उसके तरह-तरह के अर्थ लगाए जा सकते हैं। चीनी सरकार के प्रवक्ता ने एक बयान देकर कहा है कि उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर अमेरिकी और भारतीय सेना का जो ‘युद्धाभ्यास’ चल रहा है, वह बिल्कुल अनुचित है और वह 1993 और 1996 के भारत-चीन समझौतों का सरासर उल्लंघन है। सच्चाई तो यह है कि मई 2020 में चीन ने गलवान-क्षेत्र में अपने सैनिक भेजकर ही उक्त समझौतों का उल्लंघन कर दिया था। वास्तव में भारत-अमेरिका का यह युद्धाभ्यास चीन-विरोधी हथकंडा नहीं है। दोनों राष्ट्र इस तरह के कई युद्धाभ्यास जगह-जगह कर चुके हैं। यह चीन को धमकाने का कोई पैंतरा भी नहीं है। यह तो वास्तव में हिमालय-क्षेत्रों में अचानक आनेवाले भूंकप, बाढ़, पहाड़ों की टूटन, जमीन फटने जैसी विपत्तियों का सामना करने का पूर्वाभ्यास है। प्राकृतिक संकट से ग्रस्त लोगो

 
11/07/2022 उत्तराखण्ड में टसर सिल्क उत्पादन की बहतर सम्भावना- डॉ एम पी एस बिष्ट

हिमालय के सर्वागीण विकास एवं पर्यावरणीय संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। आज अंतरिक्ष तकनीक मानव के जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। यह बात कार्यशाला के मुख्य अतिथि नेशनल रिमोट सेसिंग सेन्टर, हैदराबाद के निदेशक डॉ0 प्रकाश चौहान ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुये कही। डॉ0 चौहान ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी वर्तमान में आम जन मानस की पहली प्राथमिकता बन गयी है। उन्होंने कहा कि हमारा देश अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विश्व के उन चुनिंदा देशों में स्थान पा चुका है जो अपने स

 
01/06/2022 आईआईएमसी में प्रवेश प्रक्रिया शुरू, 18 जून तक कर सकते हैं आवेदन

नई दिल्ली, 1 जून, भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) में पांच पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए आयोजित इस प्रकिया में आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 18 जून, 2022 है। प्रवेश परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन पत्र एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट  www.cuet.nta.nic.in पर उपलब्ध हैं। 

आईआईएमसी में इस वर्ष कॉमन यूनिवर्सिटीज एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी पीजी) 2022 के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। अंग्रेजी पत्रकारिता, हिंदी पत्रकारिता, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में पीजी डिप्लोमा में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को 'सीयूईटी पीजी' परीक्षा देनी होगी। प्रश्न पत्र हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में होगा। 

 



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