दिल्ली सरकार का गिग वर्कर्स के लिए बड़ा ऐलान, बनेगा वेलफेयर बोर्ड, 10 करोड़ की राशि स्वीकृत

नई दिल्ली, 16 मई 2025 —
देशभर में तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। श्रम मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने आज दिल्ली सचिवालय में स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, उबर, अर्बनक्लैप और बिगबास्केट जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों और गिग वर्कर्स के साथ पहली बैठक की अध्यक्षता की। यह पहली बार है जब किसी राज्य सरकार ने गिग वर्कर्स की समस्याओं को इतने व्यापक स्तर पर सुना और उनके समाधान के लिए ठोस पहल की।

बैठक के दौरान गिग वर्कर्स ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। उन्होंने लंबे काम के घंटे, कम वेतन और शिकायतों के निवारण की प्रभावी व्यवस्था के अभाव जैसी चुनौतियों को सामने रखा। इन बातों को गंभीरता से लेते हुए श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि सरकार अब इनके हक़ में काम करेगी। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली सरकार जल्द ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक वेलफेयर बोर्ड का गठन करेगी, जो इन श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और चिकित्सीय अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

इसके साथ ही सरकार ने गिग वर्कर्स की सहायता के लिए 10 करोड़ रुपये की विशेष राशि आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। श्री मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनियों और एग्रीगेटर्स को किसी भी प्रकार की निरीक्षण या सरकारी हस्तक्षेप से डरने की जरूरत नहीं है—सरकार सहयोग के साथ समाधान चाहती है, टकराव नहीं।

बैठक में शामिल कई कंपनियों ने भी अपने स्तर पर की गई पहलों की जानकारी दी, जिनमें चिकित्सा व दुर्घटना बीमा, कौशल विकास कार्यक्रम और वर्कर्स के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता शामिल थी।

यह पहल न केवल दिल्ली सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि शहरी अर्थव्यवस्था में गिग वर्कर्स की भूमिका को अब नीति-निर्माण के केंद्र में रखा जा रहा है। करीब 5 लाख गिग वर्कर्स दिल्ली में सक्रिय हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। नीति आयोग के मुताबिक, 2029-30 तक पूरे देश में इनकी संख्या 2.4 करोड़ तक पहुँच सकती है।

दिल्ली सरकार की यह ऐतिहासिक पहल न केवल गिग वर्कर्स के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह पूरे देश के लिए एक उदाहरण भी बनेगी कि कैसे एक समावेशी और न्यायसंगत अर्थव्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है।

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